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विकास ज़ोरों -शोरों पर
विकास ज़ोरों -शोरों पर

विकास ज़ोरों -शोरों पर  शहर में भवनों-इमारतों का निर्माण और शहर का विकास ज़ोरों-शोरों पर है। वहां काम करती औरत और उसकी पीठ पर ब...

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बुरा वक्त अच्छे लोग
बुरा वक्त अच्छे लोग

विश्व पुस्तक मेले में अंतिम दिन 'मुझे कुछ कहना है' और 'बुरा वक्त अच्छे लोग' का लोकापर्ण  नई दिल्ली : 9 दिन से  चले आ र...

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राजनीति का रंग
राजनीति का रंग

राजनीति का रंग कई सालों से देख रहा हूँ राजनीति का रंग कभी लाल कभी पीला बहा रही है आसूँ बन गई है भरी जवानी में विधवा ...

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सपनो से समझौता
सपनो से समझौता

सपनो से समझौता घर से निकला बिटिया से वादा कर गुड़िया उसकी लाएगा ,  पर खाली हाथ हैं जाता कैसे उसे समझाएगा ,  सजल नयन मासूम हृदय वो बा...

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करवटें जिंदगी की
करवटें जिंदगी की

करवटें जिंदगी की मैं रुका नहीं था कभी बस चलना चाहता था, मैं गिरा नहीं था कभी बस सम्भलना चाहता था, मेरी हार देख तुमने  मि...

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प्रतीक्षा
प्रतीक्षा

प्रतीक्षा सिंधी कहानी मूल: खिमन मूलाणी अनुवाद: देवी नागरानी जिस ब्लॉक में हम रहते थे, उसी के कोने वाले क्वार्टर में सूरजमल नाम के ...

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राजेश की डाँट
राजेश की डाँट

राजेश की डाँट प्रमोद और राजेश दोनों गहरे दोस्त थे. प्रमोद छोटा था पर शादी शुदा था और राजेश बड़ा पर अनब्याहा. दोनों सोसायटी के एक ही बिल्...

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रिश्तों की मर्यादा
रिश्तों की मर्यादा

रिश्तों की मर्यादा बचपन के मोहल्ले में रहने वाली एक मुँहबोली मौसी की बेटी स्वाति ने चिट्ठी  लिख कर सोनू को अपने घर बुलाया .. यह कहते ह...

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 हमारे नेतागण
हमारे नेतागण

 हमारे नेतागण                            मैं समझ नहीं पाता, क्यूं चुनाव आते ही नेता को हिन्दू मुस्लिम याद आता! इंसान तो इंसान ...

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चुटकी भर सिंदूर
चुटकी भर सिंदूर

चुटकी भर सिंदूर चुटकी भर सिंदूर पड़ते ही बदल जाती है पूरी दुनिया पांव तले से खींच दी जाती है जमीन जिसे आधार मानकर आज तक खड़े थे ...

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उलझनें जिंदगी
उलझनें जिंदगी

उलझनें जिंदगी क्या मिलेगा तुझको खुद पर परिताप करके जो हो चुका उसे याद कर, खुद पर उपहास करके माना गलत नहीं थे  राहें जिंदगी...

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11 काव्य संग्रहों का लोकापर्ण
11 काव्य संग्रहों का लोकापर्ण

सुप्रसिद्ध आलोचक नामवर सिंह  द्वारा 11 काव्य संग्रहों का लोकापर्ण  नई दिल्ली:  विश्व पुस्तक मेले के सातवें  दिन  राजकमल प्रकाशन समूह पर ...

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नरेंद्र कोहली के उपन्यास ‘शरणम’ पर गोष्ठी
नरेंद्र कोहली के उपन्यास ‘शरणम’ पर गोष्ठी

नरेंद्र कोहली के उपन्यास ‘शरणम’ पर गोष्ठी  विश्व पुस्तक मेले में दिनाँक 11/01/2017 को वाणी प्रकाशन के स्टॉल (हॉल 12 ए (277-288) पर नरेंद...

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दर्द होता है
दर्द होता है

दर्द होता है दर्द होता है जब अपने रूठ जाते हैं बिन बताए सहसा एक टीस-सी उठती है मन में बार-बार मुज़म्मिल जब दूर चले जाते हैं ...

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मैं अहंकार हूँ
मैं अहंकार हूँ

मैं अहंकार हूँ मैं अहंकार हूँ खुद को सर्वश्रेष्ट समझने वाला मैं एक अहंकार हूँ । दुनिया के दुखों में फँसे लोगों को देखकर मैं ...

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भारत में इस्लामीकरण का खतरा
भारत में इस्लामीकरण का खतरा

भारत में इस्लामीकरण का खतरा इस्लाम आज के युग में एक सशक्त कौम के रुप में उभर आया है। इसका इतिहास इतना प्राचीन ना होते हुए भी यह अपने क्र...

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विदेश में भारतीय भाषाएँ
विदेश में भारतीय भाषाएँ

विदेश में भारतीय भाषाएँ हिंदी भाषा भारतीय जनता के विचारों का माध्यम है, अपने आप को अभिव्यक्त करने की शैली है और इसी नींव पर टिकी है भारत...

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