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गुजरा वर्ष 

गुजरा वर्ष 
दिल भारी करता 
यादें भरता 
विनोद कुमार दवे
विनोद कुमार दवे

बीते वक़्त की 
परछाई को छोड़ 
मुंह ना मोड़ 

सुन ओ राही 
वक़्त की पगडंडी 
कंटकों भरी 

नवीन साल 
ठिठुरता सर्दी में 
हाल बेहाल

उजाला फैले 
अँधेरे रास्तों पर 
दीपक जले 

वो फिसलते 
बर्फ़ चादर पर 
प्यार के रास्ते 

अश्कों से लदी 
गठरी को ढो रहा 
वक़्त रो रहा 

बोझिल ख़्वाब 
वो कैसे ढोता रहे 
जो सोता रहे 

नव आगाज़ 
फूलों का सिंहासन 
काँटों का ताज 

वक़्त पाक है 
सदा नीरा नदी सा 
ख़ुदा ख़ुदी सा

वर्ष गुजरा 
जीवन पुस्तक का 
पृष्ठ पलटा 



रचनाकार परिचय = साहित्य जगत में नव प्रवेश।  पत्र पत्रिकाओं यथा, राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर, अहा! जिंदगी,  कादम्बिनी , बाल भास्कर आदि  में रचनाएं प्रकाशित। अध्यापन के क्षेत्र में कार्यरत।
संपर्क सूत्र - विनोद कुमार दवे,206 बड़ी ब्रह्मपुरी मुकाम, पोस्ट=भाटून्द ,तहसील =बाली ,जिला= पाली
 राजस्थान.306707.मोबाइल=9166280718 ईमेल = davevinod14@gmail.com

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