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कातिल नजरों से लजीज

कातिल नजरों से लजीज शरीखा गिरेबान !
ए लफ्ज मुकरर्र जिद ए वफा गिरेबान !
कातिल नजरों

हर दफा जरूरत मुश्किलें हालात ताबीर ,
काबिले तारीफ गम हुरियत कतरा गिरेबान !

शिद्दते दीवार तेरी टूटी दरो हरम जस्त ,
जिगर ए रूख स्याह निशा गहरा गिरेबान !

नजाकत तेरी गर्दिशों में शुमार सदियों तक ,
हर वक्त कस्तीयाँ डूबती जलसे में गिरेबान !

खबर है शबाखैर शादगी वो सासें गिन रहे ,
बरी जहुन्नियत मशले दस्तक हो गई गिरेबान !

मेहरबान है दुनिया के अस्तबल गुफा शाम ,
मयकशी भींग गई शबनमी ओस में गिरेबान

यह रचना राहुलदेव गौतम जी द्वारा लिखी गयी है .आपने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की है . आपकी "जलती हुई धूप" नामक काव्य -संग्रह प्रकाशित हो चुका  है .
संपर्क सूत्र - राहुल देव गौतम ,पोस्ट - भीमापर,जिला - गाज़ीपुर,उत्तर प्रदेश, पिन- २३३३०७
मोबाइल - ०८७९५०१०६५४

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  1. बहुत अच्छे राहुल जी, बस इतना कहूंगा कि आपकी इस कविता में उर्दू के ऐसे शब्द भी है जो हिंदी के कुछ पाठकों को समझने में कठिनाई होती होगी। जैसे 'शरीखा' 'ताबीर' 'हुरियत' ऐसे शब्दों का अर्थ कविता के अंत में उल्लेख कर देंगे तो अच्छा होगा।
    बहुत बहुत शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत-बहुत धन्यवाद !
      आपने जिन शब्दों का उल्लेख किया है उसके अर्थ है 1.मदमस्त,2.अपनाना या सच,3.मासूमियत !

      हटाएं

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