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मेरे पिता

एक साया हमसाया सा हो आप हमारे साथ सदा ,
दूजी क्या परिभाषा ढूँढू ऐसे ही हैं मेरे पिता ।
मेरे पिता
मेरे पिता

पूरा नीला गगन भी जिनके हृदय से छोटा लगता ,
हर रिश्ते मे प्रेम को गढ़ना उनके दिल मे ही जगता ,
घनी धूप मे छाँव के जैसे ऐसे ही हैं मेरे पिता ।

हर उलझन को सुलझा जाते जैसे जादू मुट्ठी मे  ,
प्रेम, प्यार और संस्कार दे दिए आपने घुट्टी मे  ,
जीवनभर की पाठशाला जैसे ऐसे ही है मेरे पिता  ।

सर्दी की धूप है या गर्मी की है ठंडी हवा  ,
पाक - साफ हृदय है जिनका ईश्वर की है आप दुआ ,
रब की प्यारी मूरत जैसे ऐसे ही है मेरे पिता ।
एक साया हमसाया सा हो आप हमारे साथ सदा

यह रचना पुष्पा सैनी जी द्वारा लिखी गयी है। आपने बी ए किया है व साहित्य मे विशेष रूची है।आपकी कुछ रचनाएँ साप्ताहिक अखबार मे छप चुकी हैं ।

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