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सरसों के फूल पर

सरसों के
पीले फूलों पर
आ बैठ मधुमक्खी
कुछ गायन कर लें
हम और तुम
सरसों
कुछ तुम चूसो रस
कुछ हम
मस्तमौला झोली भर लें I

खेतों में
अम्बार फूलों के
हवा उन्हें स्पर्श करती
गुदगुदाती
मानों बातें करती
यादें छोड़ जातीं
चंचल किरणें भी
रस चख
गाती गुनगुनाती I

तन्हा भँवरा ललचाहता
उड़ बैठ
डाली पर
फूलों पर
धाक जमाता
कहता
ये मधुवन मेरा
मधु कलियाँ मेरी I

रचनाकार परिचय
नाम-  अशोक बाबू माहौर
जन्म -10 /01 /1985
साहित्य लेखन -हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं में संलग्न
प्रकाशित साहित्य-विभिन्न पत्रिकाओं जैसे -स्वर्गविभा ,अनहदकृति ,सहित्यकुंज ,हिंदीकुंज ,साहित्य शिल्पी ,पुरवाई ,रचनाकार ,पूर्वाभास,वेबदुनिया आदि पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित I
साहित्य सम्मान -इ पत्रिका अनहदकृति की ओर से विशेष मान्यता सम्मान २०१४-१५ से अलंकृति I
अभिरुचि -साहित्य लेखन ,किताबें पढ़ना
संपर्क-ग्राम-कदमन का पुरा, तहसील-अम्बाह ,जिला-मुरैना (म.प्र.)476111
ईमेल-ashokbabu.mahour@gmail.com
9584414669 ,8802706980

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