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वर्णमाला के अक्षर 

'क'
कमल खिला जब पानी में,
करवट बदली तब हवा ने ,
कमान से निकला तीर है,
कमाल कर दिया आपने |
वर्णमाला

'ख'
खाली-खाली डिब्बा है,
खाने की कोई चीज नहीं,
खिड़की से बाहर देखो,
खरगोश फुदक रहा है |

'ग'
गरम-गरम जलेबी है,
गिलास में थोड़ा पानी है,
गलत बरताव नहीं करते,
गरीब को कभी नहीं सताते|
'घ'
घर के अन्दर आ जाओ,
घन बरस रहे है,
घमासान युद्ध छिड गया,
घायल बहुत हो गए |

'च'
चांदनी रात की बात है
चावल पक-कर तैयार है
चोर थाने से भाग गया है
चातक ऊँची उड़ान भर रहा है |

'छ'
छम-छम बारिश आई रे
छतरी को अब तो खोल रे
छोर पर वहाँ खड़े रह
  छवि  की प्रतीक्षा कर |

'ज'
जंगल में मंगल कर
जगत का यही नियम
जल से भरा गिलास
जकड कर मत पकड़ |

'झ'
झरना बहता झर -झर
झंडा फहरा फर-फर
झटपट तू चल-चल
झगड़ा मत कर-कर|

यह रचना जयश्री जाजू जी द्वारा लिखी गयी है . आप अध्यापिका के रूप में कार्यरत हैं . आप कहानियाँ व कविताएँ आदि लिखती हैं . 

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