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नरी नहीं नारी हूँ

भारतीय नारी
नर की 'नरी' नहीं
नर की अभिवृद्धि नारी है।
नारी में समाहित हैं
भारतीय नारी
भारतीय नारी
हज़ारों मानवीय रिश्ते।
वह सहस्त्रदल कमल है।
हर रिश्ते को कमल की पाँखुड़ी सी
संवारती सजोती निभाती
सम्पूर्ण कमल की मानिंद
मानवीय रिश्तों के परागकणों को
अपने अंदर समेट कर
नर के हर रूप को अपने अंदर
अंकुरित कर विकसित कर
देती है सृष्टि को नया रूप।
नारी का शरीर विग्रह है।
उन असीम अनंत मानवीय गुणों का
जो मोह, माया,  दया ,लक्ष्मी, राग ,द्वेष
प्रेम ,अकल्पना, संकल्पना ,संवेदना ,नृत्य ,संगीत
को अपने में सम्पूर्ण रूप से प्रस्फुटित ,पल्लवित कर।
सनातन संस्कृतियों का निरालंब
संवहन एवम संधारण करती है।
मानवता को नए आयाम देती है।
वह नर के चैतन्य को दुलारती है।
वह छुपा लेती है अपनी कुंठा,
अपनी टूटन अपने एकाकीपन को।
धर्म अर्थ काम मोक्ष के आधारों,
का आधार बन कर नर को मुक्ति पथ पर
प्रशस्त कर अपने अस्तित्व को खो देती है।
द्रौपदी ,सीता ,सावित्री ,राधा ,
कैकई ,काली  दुर्गा ,लक्ष्मी ,
यशोदा ,कौसल्या,अहिल्या
के सोपानों से गुजरते हुए।
कई रामों ,कृष्णों ,पेगम्बरों को ,
जन्म देकर  इस समग्र सृष्टि को ,
सुरभित सुमनों से पल्लवित करते हुए।
ढूंढ रही है अपनी अस्मिता  अपना अस्तित्व।

यह रचना सुशील कुमार शर्मा जी द्वारा लिखी गयी है . आप व्यवहारिक भूगर्भ शास्त्र और अंग्रेजी साहित्य में परास्नातक हैं। इसके साथ ही आपने बी.एड. की उपाध‍ि भी प्राप्त की है। आप वर्तमान में शासकीय आदर्श उच्च माध्य विद्यालय, गाडरवारा, मध्य प्रदेश में वरिष्ठ अध्यापक (अंग्रेजी) के पद पर कार्यरत हैं। आप एक उत्कृष्ट शिक्षा शास्त्री के आलावा सामाजिक एवं वैज्ञानिक मुद्दों पर चिंतन करने वाले लेखक के रूप में जाने जाते हैं| अंतर्राष्ट्रीय जर्नल्स में शिक्षा से सम्बंधित आलेख प्रकाशित होते रहे हैं | अापकी रचनाएं समय-समय पर देशबंधु पत्र ,साईंटिफिक वर्ल्ड ,हिंदी वर्ल्ड, साहित्य शिल्पी ,रचना कार ,काव्यसागर, स्वर्गविभा एवं अन्य  वेबसाइटो पर एवं विभ‍िन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाश‍ित हो चुकी हैं।आपको विभिन्न सम्मानों से पुरुष्कृत किया जा चुका है जिनमे प्रमुख हैं :-
 1.विपिन जोशी रास्ट्रीय शिक्षक सम्मान "द्रोणाचार्य "सम्मान  2012
 2.उर्स कमेटी गाडरवारा द्वारा सद्भावना सम्मान 2007
 3.कुष्ट रोग उन्मूलन के लिए नरसिंहपुर जिला द्वारा सम्मान 2002
 4.नशामुक्ति अभियान के लिए सम्मानित 2009
इसके आलावा आप पर्यावरण ,विज्ञान, शिक्षा एवं समाज  के सरोकारों पर नियमित लेखन कर रहे हैं |

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