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नववर्ष

एक साललो फिर से बीत गया,
एक साल और गया,
समय सरकता गया,
और नया साल  आया |
     सभी ने दी हैं बधाइयाँ,
     चारों और बिखरी खुशियाँ,
     सभी मार रहे हैं फुदकियाँ,
     आपस में मार-मार तालियाँ |
मेरे प्यारे दोस्त जन,
आज ले ये तू ठान,
बीच में रहे न कोई टूटन,
मिल-जुल रहे सभी जन |

यह रचना जयश्री जाजू जी द्वारा लिखी गयी है . आप अध्यापिका के रूप में कार्यरत हैं . आप कहानियाँ व कविताएँ आदि लिखती हैं . 

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