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हँस दे जिंदगी

थोड़ा सा हँस दे जिंदगी , थोड़ा सा तू मुस्कुरा ,
पुष्पा सैनी
पुष्पा सैनी
थोड़े बंधन तू तोड़ दे , थोड़ा सा तू गुनगुना ।
तुझको बुलाएँ मोहब्बत , मिल ले उससे तू गले,
हाथों मे हाथ थाम कर , कुछ दूरी तो हम चले ,
थोड़ा सा प्यार आने दे , थोड़े से फासले मिटा,
थोड़ा सा हँस दे जिंदगी, थोड़ा सा तू मुस्कुरा ।

देख सुहाना मौसम बाँहें फैलाकर खड़ा है ,
बंद खिड़की के पीछे तू सहमा सा क्यों खड़ा हैं
थोड़ा अहसास जगा ले , थोड़ें से पर्दे तू हटा,
थोड़ा सा हँस दे जिंदगी, थोड़ा सा तू मुस्कुरा ।

बारीश की बूँदों मे खुद को तू आज भीगो ले ,
बिखरी बिखरी जिंदगी थोड़ी सी आज संजो ले
थोड़ा रंगों को चुरा ले , थोड़े से ख्वाब तू सजा,
थोड़ा सा हँस दे जिंदगी , थोड़ा सा तू मुस्कुरा ।


यह रचना पुष्पा सैनी जी द्वारा लिखी गयी है। आपने बी ए किया है व साहित्य मे विशेष रूची है।आपकी कुछ रचनाएँ साप्ताहिक अखबार मे छप चुकी हैं ।

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