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कवि सम्मेलन

कवि सम्मेलन
आम था 
लोगों का नाम था 
दो चार कवि 
मुँह पिचकाएँ बैठे 
जैसे हो गया हरण 
भरे बाजार में I 
कवि सम्मेलन

मैंने पूछा-
'भाइयों क्या बात है ?
चेहरा बुझा बुझा'
एक कवि खड़ा हुआ 
कुछ पंक्ति जोड़ 
जवाब दिया-
'न रही रौनक 
कविता पढिने में 
लोग समाये जाते 
टीवी,सिनेमाओं में 
फिर भी 
हम कर रहे संघर्ष 
लोगों को समझाने में 
हम बुझे नहीं 
चिंता है 
हिंदी को कैसे ?
आगे ले जाएँ
साहित्य अटल बनायें I ' 

     
रचनाकार परिचय
नाम-  अशोक बाबू माहौर
जन्म -10 /01 /1985
साहित्य लेखन -हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं में संलग्न
प्रकाशित साहित्य-विभिन्न पत्रिकाओं जैसे -स्वर्गविभा ,अनहदकृति ,सहित्यकुंज ,हिंदीकुंज ,साहित्य शिल्पी ,पुरवाई ,रचनाकार ,पूर्वाभास,वेबदुनिया आदि पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित I
साहित्य सम्मान -इ पत्रिका अनहदकृति की ओर से विशेष मान्यता सम्मान २०१४-१५ से अलंकृति I
अभिरुचि -साहित्य लेखन ,किताबें पढ़ना
संपर्क-ग्राम-कदमन का पुरा, तहसील-अम्बाह ,जिला-मुरैना (म.प्र.)476111
ईमेल-ashokbabu.mahour@gmail.com
9584414669 ,8802706980 

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