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अप्सरा

एक अप्सरा कैद है
दुनिया की सबसे ऊँची चोटीपर बने तहखाने में
जिसकी भारी-भरकम चाबी लटका दी गयी है
उस पुरा-पुरुष के कंठ में
जो अभियुक्त है
अप्सरा से प्रेम करने के जुर्म में
भगवान वैद्य प्रखर
भगवान वैद्य प्रखर

पुरा-पुरुष ज्यों-ज्यों चोटी पर चढ़ता है
चाबी का वजन बढ़ता जाता है
एक युग बीत जाता है
प्राणों की बाजी लगाकर चोटीपर चढ़ते-चढ़ते
चाबी का भार सहस्त्रों टन हो जाता है
भार से पर्वत डगमगाता है
पुरा-पुरुष लड़खड़ाता है
चोटी से गिरकर चाबी समेत धरती पर आ गिरता है
उठकर, फिर चढ़ने के लिए ।

-बार-बार उठकर चोटी पर चढ़नेवाला
वह अभिशप्त पुरुष मैं हूं
बोलो, तुम अब भी कैद हो ना उस तहखाने में! ❒


जड़ें

निपट सहजता से लिख दिया है मैंने कि
मेरे बाद मकान बेच दिया जाए और
तीन हिस्से करके रकम तीनों संतानों में
बराबर बांट ली जाए

यह भी लिखते देर न लगी कि
चौपहिया बड़का ले लें
और दोनों दुपहिया दोंनों छोटे

बैंक-बैलेंस, फ़र्निचर, टी.वी., फ़्रीज...
सबके बंटवारे की सूची बन गई
बस, नामुराद ये किताबें रह गई हैं
कुछ अपनी, कुछ संजोकर रखी हुईं
जिनका कोई लेवाल नहीं
मन किसी को देवाल नहीं

सोचता हूं, लिख दूं कि
इन्हें मेरे साथ ही रख देना चिता पर
चष्मा, टोपी, लठिया के साथ
ताकि कोई यह न कहे कि
पुराना पेड़, जल तो गया
पर जड़ें जमीन में छोड़ गया है
मोबाइल, इंटरनेट के जमाने में
ये आदमी अपनी किताबें छोड़ गया है!
                                                  ❒❒


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