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अब मैं घर छोड़ चला 

अब मैं घर छोड़ चला ,
इन माया मोह विकारों का|
मैं चला परम निज धाम चला ,
जो सूरज चाँद सितारों का ||
अभिजीत पाण्डेय
अभिजीत पाण्डेय

मार्ग के सुंदर चितवन मे ,
ज्यों देखा परियां बहारों का |
फिर भटक गया मेरा चञ्चल मन ,
किया कलोल विचारों का ||

फिर याद किया शंकर वाणी,
ये काया मांस विकारों का| 
नारी का स्तन नाभि निवेश है ,
झूठा भ्रमर विहारों सा ||

मैं चला वेद के मार्ग चला ,अब 
भय नहीं सिंह श्रृंगलों का |
ना प्रेम है गोपी सा मन मे ,
ना उद्धव ज्ञान विचारों का ||

मैं वेद मंत्र के साथ चला,
फिर भय ना  किसी किनारों का |
मैं जीत सका नही मन अपना ,
क्यों बात करूँ बंजारों का ||

अब मैं घर छोड़ चला ,
इन माया मोह विकारों का |
वो सुखी रहे जग जीव चराचर ,
आग्रह वेद विचारों का ||

                   

                            -आचार्य अभिजीत पाण्डेय
गांव पोस्ट :- जईछपरा
थाना :- मांझी
जिला :- छपरा
बिहार 841209

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