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चाँद

तुम रात को आते हो
भरी जवानी में
चुपके चुपके आते हो
किससे मिलने आते हो
सज सँवर के
नव मुश्कान लिये
चाँद
बादलों कीओंट से
किसे निहारते हो
कुछ तो बोलो
किसके इंतजार में
रात बिताते हो
तिरछे नयन कर
किसको इशारा करते हो
तारों को सुलाकर
इतनी बड़ी चोरी क्यों करते हो
दिल बहलाते हो
छुप छुप कर
मुझे बताओ
कौन है वह रागिनी
मेरी मुलाकात तो करवाओ
देखूँ
उस प्रियतमा को
नहीं तो
सारी राज बता दूँगा

तुम

तुम कौन हो
इस राह से क्यों आती हो
छिप छ्प कर
क्यों देखा करती हो
इतरा के
इठला के
मटक कर
क्यों चलती हो
बार बार आकर
मुझे क्यों व्याकुल करती हो
नयन तुम्हारे
तिरछी चितवन क्यों देख रही हैं
बता इरादे
क्यों जख्म देती हो
रह रह क्यों प्यास बढ़ाती हो
आखिर तुम कौन हो?



यह रचना जयचंद प्रजापति कक्कू जी द्वारा लिखी गयी है . आप कवि के रूप में प्रसिद्ध हैं . संपर्क सूत्र - कवि जयचन्द प्रजापति 'कक्कू' जैतापुर,हंडिया,इलाहाबाद ,मो.07880438226 . ब्लॉग..kavitapraja.blogspot.com

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