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 हँसती सी तेरी आंखें

हँसती सी तेरी आंखें
आज भी शुकुन बनकर
दिल में उतर जाती है,
हो ख़ुशी कोई भी
तेरे बिन अधूरी सी
नज़र आती है
यु तो मेले हैं चारो तरफ़
हजारो राहे
बाहे फैलाये खड़ी है
फिर भी दिल
बेपरवाह सा तेरी और
झुका जाता हैं
कभी चले आना तू
दुनिया की फ़िक्र छोड़कर
एक बस मेरे लिए
शर्त भी नही कोई
न कोई बंदिश
न बंधन हैं
फिर भी कुछ तो हैं
जो तेरे कदमो का
साथ देगा
बुला न सके शायद हम
फिर भी कोई हिस्सा
दिल का
तुझे आवाज़ तो देगा
देख तेरे बिन फिर
दिवाली मनाई नही
दीयो की कोई कतार
दिल के आंगन में
सजाई नही
आते जाते रहे
मौसम बहारो के
कुछ बिखरे
कुछ सिमटे जज्बातो के
कुछ तू भी कह दे कभी
कुछ मैं भी सुनु जरा
बड़ा खामोश रहता है
क्यों आखिर कुछ नही कहता हैं
फिर कोई आवाज़ तेरे
दिल की
मेरे दिल तक चली आती है
बड़ी वफ़ा हैं इसे
मुझसे
तुझसे बिन पूछे ही
चली आती है
यु तो कट रहा है
सफर
जिंदगी का
किसी चाहत
किसी आरज़ु बिना भी
फिर भी कही
ख्वाहिश  जिन्दा सी हैं
मुझमे
तेरे और बस
तेरे लिए
तू खुश रहे,
साथ रहे न रहे
कोई झोका कभी
प्रेम का
बहे न बहे
फिर भी एक बार
कह दू तुझसे
फिर जाने वक़्त
कभी कुछ
कहे न कहे.

                                          रूबी श्रीमाली
क़स्बा- बघरा
जिला-मुज़फ्फरनगर
पिन-251306

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