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जब भी फुर्सत मिले

जब भी तुम्हे अपनी व्यस्त दिनचर्या
से फुर्सत मिले।
देखना तुम कितना सुंदर हँसती हो
खिलखिलाती गुनगुनी धूप की तरह।
फुर्सत

जब भी तुम्हे अपने विद्यार्थियों से फुर्सत मिले।
देखना तुम्हारा मन कैसा इतरा रहा है।
आँगन में घूमती तितलियों की तरह।

जब भी घर गृहस्थी के झंझावातों से बाहर निकलो।
देखना मैं वही उसी झील के किनारे
खड़ा हूँ प्यार के अभिसार के लिए।

जब भी माँ बाबूजी की सेवा से फुर्सत मिले।
देखना एक चिड़िया अपने कमरे की खिड़की पर बने घोसलें में चूजों को दाना चुगा रही है।

जब भी घर के रिश्तों को निभाने से फुर्सत मिले।
देखना मैं खड़ा हूँ तुम्हारे पीछे
तुम्हारे काले सफ़ेद बालों में
मोंगरे का गजरा लगाने।

अपने बेटे बेटियों के संदेशों से फुर्सत मिले।
तो देखना तुम्हारे मेसेज बॉक्स में
मेरे कुछ प्रेम से पगे पत्र पड़े है।
तुम्हारा अपना मैं।

यह रचना सुशील कुमार शर्मा जी द्वारा लिखी गयी है . आप व्यवहारिक भूगर्भ शास्त्र और अंग्रेजी साहित्य में परास्नातक हैं। इसके साथ ही आपने बी.एड. की उपाध‍ि भी प्राप्त की है। आप वर्तमान में शासकीय आदर्श उच्च माध्य विद्यालय, गाडरवारा, मध्य प्रदेश में वरिष्ठ अध्यापक (अंग्रेजी) के पद पर कार्यरत हैं। आप एक उत्कृष्ट शिक्षा शास्त्री के आलावा सामाजिक एवं वैज्ञानिक मुद्दों पर चिंतन करने वाले लेखक के रूप में जाने जाते हैं| अंतर्राष्ट्रीय जर्नल्स में शिक्षा से सम्बंधित आलेख प्रकाशित होते रहे हैं | अापकी रचनाएं समय-समय पर देशबंधु पत्र ,साईंटिफिक वर्ल्ड ,हिंदी वर्ल्ड, साहित्य शिल्पी ,रचना कार ,काव्यसागर, स्वर्गविभा एवं अन्य  वेबसाइटो पर एवं विभ‍िन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाश‍ित हो चुकी हैं।आपको विभिन्न सम्मानों से पुरुष्कृत किया जा चुका है जिनमे प्रमुख हैं :-
 1.विपिन जोशी रास्ट्रीय शिक्षक सम्मान "द्रोणाचार्य "सम्मान  2012
 2.उर्स कमेटी गाडरवारा द्वारा सद्भावना सम्मान 2007
 3.कुष्ट रोग उन्मूलन के लिए नरसिंहपुर जिला द्वारा सम्मान 2002
 4.नशामुक्ति अभियान के लिए सम्मानित 2009
इसके आलावा आप पर्यावरण ,विज्ञान, शिक्षा एवं समाज  के सरोकारों पर नियमित लेखन कर रहे हैं |

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