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वक़्त न लौटेगा

निभा ले कोई रस्म
वक़्त न लौटेगा फिर
कोई आगाज़ लेकर,
टूट जायेगी जो
वक़्त के साथ
टूटी उन उम्मीदों का
हिसाब लेकर,
वक़्त न लौटेगा
आ गए दूर बहुत
कुछ तेरे कुछ तेरी
यादो के साथ,
मुमकिन तो नही
एहसास सब
चनंद शब्दो में
उतार दू ,
कहा भी हैं बहुत कुछ
कुछ अधूरा सा भी हैं।  
गुजरता रहा वक़्त
अपनी रफ़्तार से,
करके कोई शिकायत
दिल तेरा भी
दुखाते रहे
और मनाते रहे,
वक़्त हमें या
वक़्त को हम
आजमाते रहे
बिखर जाते हैं कभी,
कभी आकर
संभाल लेता हैं
एहसास कोई तेरा,
बस इस तरह
जिंदगी का गुज़ारा हैं,
हम हो न हो तेरे
कुछ तो है तुझमे
जो हमारा बस हमारा हैं
आगे बढ न पाएंगे
कदम तेरे बिन अकेले,
रहता है दिल में
जो एहसास
उसे रह जाने दे....................


                                          रूबी श्रीमाली
क़स्बा- बघरा
जिला-मुज़फ्फरनगर
पिन-251306

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