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फिर लौट आया

आ फिर लौट आया कभी
फिर मुस्कुरा दू मैं तेरे लबो पर
फिर तू रूठ जाये किसी बात पर
फिर मैं मना लु तुझे कही
  रूबी श्रीमाली
  रूबी श्रीमाली
फिर वो महकी सी हवा चले
फिर मैं खो जाऊ उसमे कही
फिर कोई शरारत तेरी 
चेहरे पर बिखेर जाये कोई हँसी
फिर मैं खुद को तेरी बाहों में छिपा लू कही
फिर हम हो जाये हम
हम और तुम से
फिर तुझे सीने से लगा लू कही
न छीन सके तुझे मुझसे कोई
फिर तुझे इतना अपना बना लू कही
फिर से गिनु तेरे साथ तारे वही
फिर बैठे घंटो बाते किया करु
फिर भूल जाओ मैं इस दुनिया को
फिर कुछ अपना सा जीऊ
फिर लौट आये तू सदा के लिए
फिर हम आँखों में मुस्कराहट भरू
यु तो तू आज भी हर लम्हे में शामिल है मेरे
पर कुछ अधूरा सा हैं,टुटा सा हैं
भूल जाऊ सब दर्द मैं
फिर इस तरह दिल में छिपा ले कही.
                               
रूबी श्रीमाली
क़स्बा- बघरा
जिला-मुज़फ्फरनगर
पिन-251306

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