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कलयुग का सुख

लक्ष्मी जी
सोहनी ने दीपावली की रात को टोटका कर कुछ सिन्दूर अपनी पड़ोसन मोहनी के घर डाला सोचा उसकी कुछ परेशानी कम हो जायेगी।
रात को लक्ष्मी जी भ्रमण को निकली सोहनी की हरकत देख कर बड़ा आश्चर्य हुआ। लक्ष्मी जी सोचने लगीं दिन में तो इन दोनों के बीच बहुत मधुर व्यवहार रहता है लेकिन रात के अँधेरे में ये कैसा गलत व्यवहार?
लक्ष्मी जी ने सोहनी की परीक्षा लेनी चाही रात को उन्होंने सोहनी को स्वप्न में में दर्शन दिए ।उन्होंने सोहनी से कहा *" बोलो सोहनी तुम्हे क्या चाहिए ?"
सोहनी ने कहा *"मुझे कुछ नहीं चाहिए बस आप मोहनी को बहुत सारे दुःख देदो।"
लक्ष्मी जी ने कहा *"उसे दुखी क्यों देखना चाहती हो?"
सोहनी ने कहा *"लक्ष्मीजी ये कलयुग है आपको नहीं मालूम कलयुग में इंसान सिर्फ दूसरे विशेष कर अपने पड़ोसियों और रिश्तेदारों के दुःख देख कर ही सुखी होता है।और कोई चीज उसे इतना सुख नहीं दे सकती।"*
लक्ष्मी जी सोहनी के जबाब से अभी तक सदमे मे है।

यह रचना सुशील कुमार शर्मा जी द्वारा लिखी गयी है . आप व्यवहारिक भूगर्भ शास्त्र और अंग्रेजी साहित्य में परास्नातक हैं। इसके साथ ही आपने बी.एड. की उपाध‍ि भी प्राप्त की है। आप वर्तमान में शासकीय आदर्श उच्च माध्य विद्यालय, गाडरवारा, मध्य प्रदेश में वरिष्ठ अध्यापक (अंग्रेजी) के पद पर कार्यरत हैं। आप एक उत्कृष्ट शिक्षा शास्त्री के आलावा सामाजिक एवं वैज्ञानिक मुद्दों पर चिंतन करने वाले लेखक के रूप में जाने जाते हैं| अंतर्राष्ट्रीय जर्नल्स में शिक्षा से सम्बंधित आलेख प्रकाशित होते रहे हैं | अापकी रचनाएं समय-समय पर देशबंधु पत्र ,साईंटिफिक वर्ल्ड ,हिंदी वर्ल्ड, साहित्य शिल्पी ,रचना कार ,काव्यसागर, स्वर्गविभा एवं अन्य  वेबसाइटो पर एवं विभ‍िन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाश‍ित हो चुकी हैं।आपको विभिन्न सम्मानों से पुरुष्कृत किया जा चुका है जिनमे प्रमुख हैं :-
 1.विपिन जोशी रास्ट्रीय शिक्षक सम्मान "द्रोणाचार्य "सम्मान  2012
 2.उर्स कमेटी गाडरवारा द्वारा सद्भावना सम्मान 2007
 3.कुष्ट रोग उन्मूलन के लिए नरसिंहपुर जिला द्वारा सम्मान 2002
 4.नशामुक्ति अभियान के लिए सम्मानित 2009
इसके आलावा आप पर्यावरण ,विज्ञान, शिक्षा एवं समाज  के सरोकारों पर नियमित लेखन कर रहे हैं |

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