नवरात्र

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माँ की साधना हमेशा उनके सूर्य मंडल भव्यस्था की छवि बना कर करनी चाहिए। उच्च स्तरीय साधना में माँ का पूरा आवरण शुभ्रा ज्योति के स्वरुप में ही परिलक्षित होता है।

आध्यात्मिक चेतना का पर्व - नवरात्र

माँ भगवती दुर्गा जगत जननी हैं ,अपरा हैं ,प्रकृति है ,मूलरूप से सबकी चेतना में उनकी ऊर्जा ही संचरित होती है। वो ममत्व की पराकाष्ठा हैं। तेज ,दीप्ति ,दुति ,चेतना,कांति और जीवन प्रदायनी उस ऊर्जा को समन्वित कर आध्यात्मिक चेतना का पर्व नवरात्र है।
            नवशक्तिभिः संयुक्तं नवरात्रं तदुच्यते।
नौ देवियों की संयुक्त शक्तियाँ  नवरात्र के रूप में पूजित होती है। साल में चार नवरात्र होते है। बसंत नवरात्र ,शारदीय नवरात्र एवं आषाढ़  व माघ के गुप्त नवरात्र। बसंत नवरात्र चित्र शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक ,बसंत नवरात्र आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक ,आषाढ़ गुप्त नवरात्र आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक एवं माघ गुप्त नवरात्र माघ शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक माने गए है।

नवरात्री साधना की प्रक्रिया एवं उद्देश्य

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साधना का अर्थ अपने को सीधा करना है। अर्थात अपने मनोगत विचारों एवं अंतरात्मा की भाव संवेदनाओं के स्तर को ऊँचा उठाना है। नवरात्री साधना का मुख्य उद्देश्य हमारे अंदर की पशुता को बिन्दुरूप कर विराट देवत्व की प्रतिस्थापना है।
भारतीय गृहस्थ जीवन शक्तिपूजन,व्यक्तित्व संवर्धन एवं आध्यात्मिक चेतना जाग्रत करने का एक विराट संकल्प है। माँ दुर्गा की पूजन से हमारे समाज में स्त्रियों को माता ,देवी एवं पूज्य का स्थान प्राप्त होता है। नवरात्रों में देवी की पूजन से काम ,क्रोध ,मोह एवं लोभ पर नियंत्रण संभव है। मन अंतःकरण ,चित्त बुद्धि ,अहंकार आदि का
शोधन होकर बुरे संस्कारों का शमन होता है। हमारे तन और मन में रहने वाले राक्षसों जो की रोग ,अहंकार ,भय ,बंधन,पाप ,शोक, दुःख एवं महामारी के स्वरूप में हमें प्रताड़ित करते है इन सभी का दमन और शमन का उपाय नवरात्री साधना है।
नवरात्री साधना आध्यात्मिकता की ओर ले जाने वाली वह प्रक्रिया है जिससे हमारी चेतना पर छाई  धुंध छट जाती है एवं आंतरिक अवसाद नष्ट हो जाते हैं। नवरात्र साधना व्यक्तित्व  का परिशोधन  है। इससे चेतना की प्रखरता प्रगाढ़ होती है। पशु संस्कार देवत्व में बदलने लगते है। यह साधना मनुष्य को सामान्य से देवीय स्तर प्रदान करती है। वस्तुतः नवदुर्गा साधना आत्मचेतन की गहरी परतों को खोल कर प्रसुप्त शक्तियों को ऊर्जावान एवं जाग्रत बनाने की प्रक्रिया है।साधना का उद्देश्य कामनापूर्ति न होकर अंतःकरण की निर्मलता की प्राप्ति है श्रेष्ठ साधक सदा ही लोकहित में अपनी साधना का समर्पण करते हैं।  हमारी नौ इन्द्रियों में निवास करने वाली साक्षात पराम्बा माँ दुर्गा ही है इन्ही की साधना से ये नौ इन्द्रियां संयमित होती हैं एवं अंत में मन ,शरीर और आत्मा को गति प्राप्त होती है।
 प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयम् ब्रह्मचारिणी। तृतीयं चंद्रघण्टेति कुष्मांडेति चतुर्थकं॥
 पंचमं स्कंदमातेति, षष्टम कात्यायनीति च। सप्तमं कालरात्रीति, महागौरीति चाष्टमं॥
 नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा प्रकीर्तिताः॥
 कूर्म पुराण के अनुसार धरती पर स्त्री का जीवन नवदुर्गा के स्वरूपों में प्रतिबिंबित है। जन्म ग्रहण करनेवाली कन्या का रूप शैलपुत्री ,कौमार्य तक ब्रह्मचारिणी ,विवाह के पूर्व तक षोडशी चन्द्रघंटा ,नए जीवन को धारण करनेवाली कूष्माण्डा ,संतान को जन्म देने वाली स्कंदमाता ,संयम और साधनारत कात्यायनी , पति की अकारण मृत्यु को जीतने वाली कालरात्रि ,संसार का उपकार करनेवाली महागौरी एवं सर्वसिद्धि प्रदायनी सिद्धिदात्री हैं।

नवदुर्गा साधना में विहित कार्य :

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**सच्चे मन से अपनी एक बुराई को दूर करने का संकल्प लें।
**धार्मिकता का अर्थ अन्धविश्वास नहीं होता है। अपने आसपास में अगर आपको लगता है की अन्धविश्वास पनप रहा है तो उसे दूर करने का संकल्प लें।
**प्रतिदिन एक समाज उपयोगी कार्य अवश्य करें।
**अपने घर के वातावरण को प्रेममय बनाएं,मातृ स्वरूपा माँ ,बहिन एवं अन्यान्न महिला संबंधियों को उनके रिश्ते के आधार पर सम्मान एवं आदर भेंट करें।
**प्रकृति का स्वरुप ही जगदम्बा हैं। अतः इन नौ दिनों में प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करें। इन दिनों देखा जाता है की लोग फूल पेड़ और पौधों को विशेष करपुष्प के पौधों विल्व पत्र एवं शमी के पौधों को बेरहमी से नोचते हैं ये भी माँ भगवती के ही अंग प्रत्यंग है। इन्हे नुकसान पहुंचा कर आप अपनी साधना को सफल नहीं कर सकते हैं।
**प्रतिदिन मंदिर में जा कर माँ के समक्ष जनकल्याण एवं देश कल्याण की कामना करें।
** माँ से अपने लिए कुछ न मांगे। माँ आपकी हर स्थिति से परिचित हैं आप सिर्फ माँ का सानिध्य मांगे। जब माँ पास होगी तो आप को कई कठनाई छू भी नहीं सकती।
**जो भी भोग माँ को समर्पित करे उसका सिर्फ एक भाग बचा कर बांकी गाय और गरीब को दान कर दें।
**नौ दिन तक सदाचार से रहे मानसिक एवं शारीरिक रूप से किसी का मन न दुखाएं।
** सात्विक आहार से व्रत का पालन करने से शरीर की शुद्धि एवं मन क्रम वचन से पवित्रता धारण होती है।

नवदुर्गा पूजन का क्रम :

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** प्रथम दिन उत्तम मुहूर्त में घट स्थापन -सभी देवताओं का आवाहन,आसान एवं अर्घ्य। बाकि दिनों में षोडशोपचार से पूजन करना चाहिए।
**दीप प्रज्ज्वलन -अखण्डज्योति या पाठ ज्योति का प्रज्ज्वलन।
**प्रतिदिन सभी आवाहित देवताओं के पूजन के पश्चात माँ का षोडशोपचार से पूजन करना चाहिए।
**पूजन में विल्व शाखा ,विल्व पत्र ,शमी पत्र ,श्रीफल ,लाल कनेर, चंपा चमेली के पुष्प का प्रयोग करें। दुर्गा पूजा में दूर्वा ,तुलसी एवं आवंला का प्रयोग निषिद्ध है। गीले वस्त्रों में  एवं महिलाएं खुले बालों के साथ दुर्गा पूजन न करें। हवन के समय गले में दुपट्टा आदि न डालें। सूतक में घट स्थापन एवं मूर्ति स्पर्श वर्जित है। ऐसे समय योग्य पंडित से पूजन करवायें।
**दुर्गा सप्तशती का पाठ क्रम निम्नानुसार करें
-1- संकल्प 2- कवच,अर्गला एवं कीलक का पाठ 3-रात्रिसूक्त एवं देव्यअथर्व शीर्ष का पाठ 4 -न्यास सहित नवार्ण जप ( 108 ) 5 -दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों का पाठ 6 -न्यास सहित नवार्ण जप ( 108 ) 7 -त्रिमूर्ति रहस्य पाठ (ये वैकल्पिक है सकाम अनुष्ठान में आवश्यक ) 8-देवीसूक्त का पाठ 9 -सिद्ध कुंजिका स्त्रोत का पाठ 10 -क्षमा प्रार्थना स्त्रोत एवं जप समर्पण।
** आरती -माँ भगवती दुर्गा की 14 बार आरती उतारने का विधान है,चार बार चरणों में ,दो बार नाभि पर ,एक बार मुख पर एवं सात बार सम्पूर्ण शरीर पर आरती उतारना चाहिये। आरती की बत्तियों की संख्या विषम होनी चाहिये।
**प्रत्येक दिन नौ वर्ष तक की कन्याओं का विधिवत पूजन करके उनका प्रिय भोज्य पदार्थ अर्पण करना चाहिए।

 नवरात्र में माँ दुर्गा को लगाये जाने वाले भोग :-

1 -प्रतिपदा को घी का भोग लगाएं इससे रोगों से मुक्ति मिलती है। 2 -द्वतिया को शक्कर का भोग लगाएं इससे दीर्घायु की प्राप्ति होती है। 3 -तृतीया को दूध का भोग लगाने से दैहिक एवं भौतिक दुखों से मुक्ति मिलती है। 4 -चतुर्थी को मालपुआ का भोग लगाये इससे बुद्धि की प्राप्ति होती है। 5 -पंचमी में केले का भोग लगाने से परिवार में सुख शांति व्याप्त होती है। 6 -षष्ठी के दिन शहद का भोग लगाने से धन सम्बन्धी परेशानियों से मुक्ति मिलती है। 7 -सप्तमी को गुड़ का भोग लगाने से दरिद्रता का नाश होता है। 8 -महाष्टमी को खीर एवं हलुआ पूरी का भोग लगाने से संतान एवं सुख समृद्धि की  प्राप्ति होती है। 9 -नवमी को विभिन्न अनाजों का भोग लगाने से आध्यात्मिक एवं पारलौकिक शक्तियाँ प्राप्त होती हैं।
 माँ की साधना हमेशा उनके सूर्य मंडल भव्यस्था की छवि बना कर करनी चाहिए। उच्च स्तरीय साधना में माँ का पूरा आवरण शुभ्रा ज्योति के स्वरुप में ही परिलक्षित होता है। प्रथम स्तरीय के साधकों में माँ का नारी देह स्वरुप एवं स्वप्न एवं सुप्त अवस्थाओं में जाग्रति साक्षात्कार होता है। उच्च स्तरीय साधकों को प्रकाश की छोटी चिंगारियों एवं तेजस्वी ज्योतिपिण्ड के रूप में दर्शन व साक्षात्कार होता है।
नवदुर्गा की साधना आध्यात्मिक विचारों को व्यवहारिक रूप में परिणित करती है। इस साधना से हमारे अन्नमयकोश ,मनोमयकोश ,प्राणमयकोश ,विज्ञानमयकोश एवं आनन्दमयकोश उपचारित होकर ऊर्जावान बनते हैं। इससे साधक दुर्लभ योगी की श्रेणी प्राप्त कर सकता है। इन पांचो कोषों का संवर्धन एवं प्रक्षालन माँ की साधना से संभव होकर उनके सानिध्य की प्राप्ति कराता है ,एवं माँ अपने पुत्रों को अभयदान देती हैं।                      
                  सर्वबाधा विर्निमुक्तो धनधान्यसुतान्वित:।
                  मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय:।।


यह रचना सुशील कुमार शर्मा जी द्वारा लिखी गयी है . आप व्यवहारिक भूगर्भ शास्त्र और अंग्रेजी साहित्य में परास्नातक हैं। इसके साथ ही आपने बी.एड. की उपाध‍ि भी प्राप्त की है। आप वर्तमान में शासकीय आदर्श उच्च माध्य विद्यालय, गाडरवारा, मध्य प्रदेश में वरिष्ठ अध्यापक (अंग्रेजी) के पद पर कार्यरत हैं। आप एक उत्कृष्ट शिक्षा शास्त्री के आलावा सामाजिक एवं वैज्ञानिक मुद्दों पर चिंतन करने वाले लेखक के रूप में जाने जाते हैं| अंतर्राष्ट्रीय जर्नल्स में शिक्षा से सम्बंधित आलेख प्रकाशित होते रहे हैं | अापकी रचनाएं समय-समय पर देशबंधु पत्र ,साईंटिफिक वर्ल्ड ,हिंदी वर्ल्ड, साहित्य शिल्पी ,रचना कार ,काव्यसागर, स्वर्गविभा एवं अन्य  वेबसाइटो पर एवं विभ‍िन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाश‍ित हो चुकी हैं।आपको विभिन्न सम्मानों से पुरुष्कृत किया जा चुका है जिनमे प्रमुख हैं :-
 1.विपिन जोशी रास्ट्रीय शिक्षक सम्मान "द्रोणाचार्य "सम्मान  2012
 2.उर्स कमेटी गाडरवारा द्वारा सद्भावना सम्मान 2007
 3.कुष्ट रोग उन्मूलन के लिए नरसिंहपुर जिला द्वारा सम्मान 2002
 4.नशामुक्ति अभियान के लिए सम्मानित 2009
इसके आलावा आप पर्यावरण ,विज्ञान, शिक्षा एवं समाज  के सरोकारों पर नियमित लेखन कर रहे हैं |

COMMENTS

BLOGGER: 1
  1. बोलो अम्बे मत की जय
    नवरात्री की ढेरों शुभकामनाये. माँ अम्बे की आशीर्वाद हमेशा आप पर बना रहे

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अंग्रेज़ी हिन्दी शब्दकोश,3,अकबर इलाहाबादी,11,अकबर बीरबल के किस्से,58,अज्ञेय,27,अटल बिहारी वाजपेयी,1,अदम गोंडवी,3,अनंतमूर्ति,3,अनौपचारिक पत्र,16,अन्तोन चेख़व,2,अमीर खुसरो,6,अमृत राय,1,अमृतलाल नागर,1,अमृता प्रीतम,5,अयोध्यासिंह उपाध्याय "हरिऔध",4,अली सरदार जाफ़री,3,अष्टछाप,2,असगर वज़ाहत,11,आनंदमठ,4,आरती,9,आर्थिक लेख,5,आषाढ़ का एक दिन,9,इक़बाल,2,इब्ने इंशा,27,इस्मत चुगताई,3,उपेन्द्रनाथ अश्क,1,उर्दू साहित्‍य,176,उर्दू हिंदी शब्दकोश,1,उषा प्रियंवदा,1,एकांकी संचय,7,औपचारिक पत्र,31,कबीर के दोहे,19,कबीर के पद,1,कबीरदास,10,कमलेश्वर,4,कविता,603,कहानी सुनो,2,काका हाथरसी,4,कामायनी,5,काव्य मंजरी,11,काशीनाथ सिंह,1,कुंज वीथि,12,कुँवर नारायण,1,कुबेरनाथ राय,1,कुर्रतुल-ऐन-हैदर,1,कृष्णा सोबती,1,केदारनाथ अग्रवाल,1,केशवदास,1,कैफ़ी आज़मी,4,क्षेत्रपाल शर्मा,32,खलील जिब्रान,3,ग़ज़ल,80,गजानन माधव "मुक्तिबोध",10,गीतांजलि,1,गोदान,6,गोपाल सिंह नेपाली,1,गोपालदास नीरज,7,गोरा,2,घनानंद,1,चन्द्रधर शर्मा गुलेरी,2,चित्र शृंखला,1,चुटकुले जोक्स,15,छायावाद,6,जगदीश्वर चतुर्वेदी,6,जयशंकर प्रसाद,18,जातक कथाएँ,10,जीवन परिचय,3,ज़ेन कहानियाँ,2,जैनेन्द्र कुमार,1,जोश मलीहाबादी,2,ज़ौक़,4,तुलसीदास,5,तेलानीराम के किस्से,7,त्रिलोचन,1,दाग़ देहलवी,5,दादी माँ की कहानियाँ,1,दुष्यंत कुमार,6,देव,1,देवी नागरानी,23,धर्मवीर भारती,2,नज़ीर अकबराबादी,3,नव कहानी,2,नवगीत,1,नागार्जुन,15,नाटक,1,निराला,27,निर्मल वर्मा,1,निर्मला,26,नेत्रा देशपाण्डेय,3,पंचतंत्र की कहानियां,42,पत्र लेखन,120,परशुराम की प्रतीक्षा,3,पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र',3,पाण्डेय बेचन शर्मा,1,पुस्तक समीक्षा,51,प्रेमचंद,22,प्रेमचंद की कहानियाँ,89,प्रेरक कहानी,15,फणीश्वर नाथ रेणु,1,फ़िराक़ गोरखपुरी,9,फ़ैज़ अहमद फ़ैज़,24,बच्चों की कहानियां,64,बदीउज़्ज़माँ,1,बहादुर शाह ज़फ़र,6,बाल कहानियाँ,14,बाल दिवस,3,बालकृष्ण शर्मा 'नवीन',1,बिहारी,1,बैताल पचीसी,2,भक्ति साहित्य,91,भगवतीचरण वर्मा,5,भवानीप्रसाद मिश्र,3,भारतीय कहानियाँ,59,भारतीय व्यंग्य चित्रकार,7,भारतेन्दु हरिश्चन्द्र,6,भीष्म साहनी,5,भैरव प्रसाद गुप्त,2,मंगल ज्ञानानुभाव,22,मजरूह सुल्तानपुरी,1,मधुशाला,7,मनोज सिंह,16,मन्नू भंडारी,3,मलिक मुहम्मद जायसी,1,महादेवी वर्मा,11,महावीरप्रसाद द्विवेदी,1,महीप सिंह,1,महेंद्र भटनागर,73,माखनलाल चतुर्वेदी,3,मिर्ज़ा गालिब,39,मीर तक़ी 'मीर',20,मीरा बाई के पद,22,मुल्ला नसरुद्दीन,6,मुहावरे,4,मैथिलीशरण गुप्त,8,मोहन राकेश,9,यशपाल,9,रंगराज अयंगर,40,रघुवीर सहाय,5,रणजीत कुमार,29,रवीन्द्रनाथ ठाकुर,21,रसखान,11,रांगेय राघव,2,राजकमल चौधरी,1,राजनीतिक लेख,10,राजभाषा हिंदी,46,राजिन्दर सिंह बेदी,1,राजीव कुमार थेपड़ा,4,रामचंद्र शुक्ल,1,रामधारी सिंह दिनकर,17,रामप्रसाद 'बिस्मिल',1,रामविलास शर्मा,8,राही मासूम रजा,8,राहुल सांकृत्यायन,1,रीतिकाल,3,रैदास,2,लघु कथा,61,लोकगीत,1,वरदान,11,विचार मंथन,60,विज्ञान,1,विदेशी कहानियाँ,14,विद्यापति,4,विविध जानकारी,1,विष्णु प्रभाकर,1,वृंदावनलाल वर्मा,1,वैज्ञानिक लेख,3,शमशेर बहादुर सिंह,5,शरत चन्द्र चट्टोपाध्याय,1,शरद जोशी,3,शिवमंगल सिंह सुमन,5,शुभकामना,1,शैक्षणिक लेख,9,शैलेश मटियानी,2,श्यामसुन्दर दास,1,श्रीकांत वर्मा,1,श्रीलाल शुक्ल,1,संस्मरण,6,सआदत हसन मंटो,9,सतरंगी बातें,32,सन्देश,11,समीक्षा,1,सर्वेश्वरदयाल सक्सेना,16,सारा आकाश,12,साहित्य सागर,21,साहित्यिक लेख,14,साहिर लुधियानवी,5,सिंह और सियार,1,सुदर्शन,1,सुदामा पाण्डेय "धूमिल",6,सुभद्राकुमारी चौहान,6,सुमित्रानंदन पन्त,16,सूरदास,3,सूरदास के पद,21,स्त्री विमर्श,8,हजारी प्रसाद द्विवेदी,1,हरिवंशराय बच्चन,26,हरिशंकर परसाई,21,हिंदी कथाकार,12,हिंदी निबंध,136,हिंदी लेख,268,हिंदी समाचार,59,हिंदीकुंज सहयोग,1,हिन्दी,5,हिन्दी टूल,4,हिन्दी आलोचक,7,हिन्दी कहानी,31,हिन्दी गद्यकार,4,हिन्दी दिवस,38,हिन्दी वर्णमाला,3,हिन्दी व्याकरण,42,हिन्दी संख्याएँ,1,हिन्दी साहित्य,8,हिन्दी साहित्य का इतिहास,22,हिन्दीकुंज विडियो,11,aaroh bhag 2,13,astrology,1,Attaullah Khan,1,baccho ke liye hindi kavita,53,Beauty Tips Hindi,3,English Grammar in Hindi,3,hindi ebooks,5,hindi essay,128,hindi grammar,49,Hindi Sahitya Ka Itihas,37,hindi stories,432,ICSE Hindi Gadya Sankalan,11,Kshitij Bhag 2,10,mb,72,motivational books,5,naya raasta icse,8,Notifications,5,question paper,8,quizzes,8,Shayari In Hindi,11,sponsored news,2,Syllabus,7,VITAN BHAG-2,5,vocabulary,13,
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