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दीपावली

यह दीपावली
कितना भाती है
हर साल आती है
खुशियाँ लाती है

कतारों में
जब दीपक जलते हैं
दीपावली
दीपावली
मन भर जाता है खुशियों से

यह पर्व
हर साल याद दिलाता है
मन का अँधकार भगाओ
जीवन सतरंगी बनाओ

यह पर्व
हमें सत्य पथ पर
चलने को कहता है
मन के दुराव को
दूर करने की बात करता है

गंदी सोंच हटाओ प्यारों
दीपावली की छटा बिखेरो यारों
नव दीपक जलाओ इस धरा पर
यही सब की कामना है

हे दीपक के राजा!
बार-बार आना
नव संचार करते रहना
अँधेरा भगाते रहना
इस मानव समाज को
राह दिखाते रहना
......................................

भारत माँ

भारत माँ
तेरे चरणों में
यह सिर झुकाता हूँ

तुम्हारे लिये
यह जीवन समर्पित करता हूँ
यह तुच्छ प्राणी
और क्या दे सकता है

भारत माँ
तू जिन्दा सदियों तक रहे
यही हमारी अभिलाषा है

करता हूँ
जयचन्द प्रजापति 'कक्कू जी'
नित मैं वंदन तेरी
सजा रहे
तेरा मस्तक
हरी भरी रहो तुम

ममतामयी रूप तेरा
यही मुझे भाता है
कैसे मैं भुलूँ
पला बढ़ा हूँ
तेरी माटी में

खाकर अन्न जल तेरा
अगर कोई न सोंचे
तुम्हारे बारे में
मिले मौत उसे दुश्मन की

भारत माँ
तुझे शत-शत
नमन करता हूँ

यह रचना जयचंद प्रजापति कक्कू जी द्वारा लिखी गयी है . आप कवि के रूप में प्रसिद्ध हैं . संपर्क सूत्र - कवि जयचन्द प्रजापति 'कक्कू' जैतापुर,हंडिया,इलाहाबाद ,मो.07880438226 . ब्लॉग..kavitapraja.blogspot.com

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