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दिल की बातें

दिल की बातें किसी से कह डाले 
चलो गम अपना दिल से सह डाले ।
आँखों से आँसू आज बहने लगे 
टूट कर आँसू हमसे कहने लगे 
आँसूओं को साथी बना डाले 
दिल की बातें
चलो गम अपना दिल से सह डाले ।
हर तरफ गम की है परछाई 
कहने लगी हमसे ये तन्हाई 
अपना एक घर अलग बसा डाले ।
ठंडी - ठंडी हवा के ये झोंके 
दर्द को ये भी ना आकर रोके 
हवा के साथ इनको भी बहा डालें 
चलो गम अपना दिल से सह डालें ।
हमसफर राह मे मिलते हैं कहां 
फूल पतझड मे खिलते है कहां 
पतछड से दिल को सजा डाले 
चलो गम अपना दिल से सह डाले ।
गम मे खुशी से कैसे रहे 
बोलो गम को खुशी हम कैसे कहें 
झूठ को सच ही आज कह डाले 
चलो गम अपना दिल से सह डाले ।

यह रचना पुष्पा सैनी जी द्वारा लिखी गयी है। आपने बी ए किया है व साहित्य मे विशेष रूची है।आपकी कुछ रचनाएँ साप्ताहिक अखबार मे छप चुकी हैं ।

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