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दीपशिखा 

पति पत्नी  बेटा चाहते थे। भ्रूण लिंग परीक्षण से जब पेट में लड़की होने का पता चला। दीपावली का त्योहार सिर पर था। दोनों ने फैसला किया कि दीवाली पश्चात इस अनचाही मुसीबत से छुटकारा पा लेंगे। 
धनतेरस पर लक्ष्मी पूजन की तैयारियां जोरों पर थी। सब घरवालों ने मिलकर माँ लक्ष्मी की आरती उतारी। व्यापार में उन्नति तो देवी की कृपा बिना कैसे मिलती? सभी ने जी जान से पूजा में भाग लिया। आधी रात को जब सभी जन घोर नींद में थे, पत्नी स्वप्न में देखती है, 
विनोद कुमार दवे
विनोद कुमार दवे 
उसका घर रोशनी से जगमगा उठा है। उनका प्यारा बेटा, घर का चिराग, कुल का दीपक घर में इतना उजाला लेकर आया है। अपने बेटे को देख माँ का चेहरा खिल उठा, मगर ये क्या? ये रोशनी कहाँ जा रही हैं। ये उजाला, ये जगमगाहट अँधेरे में बदलती जा रही है। दीपक बुझ रहे है। हाय विधाता! कुल का दीपक मत बुझा। ये चिराग तो बड़ी मन्नतों बाद जला है। ये हवाएँ, आँधियाँ, ये तूफ़ान, ये बारिशें  घर में क्यों? हे ईश्वर! रहम कर। दया देखो प्रभु! घनघोर अँधेरा छाया है घर में। दरिद्रता का शासन है घर में। ये क्या हो गया? कैसे बुझ गया चिराग। उजाला कहाँ गया। माँ घर में मारे दुःख के भाग रही है। इस कोने से उस कोने। इस कमरे से उस कमरे। आँगन से पूजा घर तक। हाय विधाता! हाय विधाता! 
ये क्या? पूजा घर में रोशनी। यह दीप शिखा कहाँ जल रही है? 
माँ बेहोशी की हालत में फर्श पर पड़ी हैं। निस्सहाय, बेबस, लाचार। पिता भी अपना कुल दीप नहीं पाकर फर्श पर बेसुध पड़े हैं। 
ओह। ये कोमल स्पर्श। ये नाजुक हथेलियाँ। माँ के गालों पर फिरती अंगुलियां। आँखों से बहे काजल को अपने दुपट्टे से पोंछते हाथ। 
पिता का सर सहलाती। पिता का सहारा बनती। पापा को हवा देने के लिए अपनी चुनरी लहराती। 
साथ रोती। साथ हँसती। कुल की दीपिका। घर की दीप शिखा। 
स्वप्न क्या टूटा। उसने देखा। पसीने से लथपथ। आँखों से आंसुओं की धार। किन्तु चेहरे पर मुस्कान थी। उसने अपना पेट सहलाया। अंदर बेटी सो रही थी। और अहोभाग्य! माँ जाग चुकी थी। 


यह रचना विनोद कुमार दवे जी द्वारा लिखी गयी है .आपकी,पत्र पत्रिकाओं यथा, राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर, अहा! जिंदगी,  कादम्बिनी , बाल भास्कर आदि  में कुछ रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं ।आप वर्त्तमान में अध्यापन के क्षेत्र में कार्यरत हैं .
सपंर्क सूत्र -
विनोद कुमार दवे
206
बड़ी ब्रह्मपुरी
मुकाम पोस्ट=भाटून्द
तहसील =बाली
जिला= पाली
राजस्थान
306707
मोबाइल=9166280718
ईमेल = davevinod14@gmail.com

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