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छोटी सी जगह 

छोटा-सा 
एक रास्ता 
जो जाता 
तुम्हारे दिल तक 
और लौटता 
मेरे दिल से होकर l 
चाहता हूँ -
इस रास्ते के सहारे पहुँचूँ
तुम्हारे दिल के किसी कोने तक 
जहाँ बना सकूँ
डॉ0 विवेक कुमार
डॉ0 विवेक कुमार
मैं एक छोटी जगह। 
क्योंकि इस महानगरीय 
जीवन में सब कुछ है बिकाऊ 
रिश्ते-नाते 
दोस्त-मित्र 
हँसी-मुस्कान ।
किंतु -
मैं बनाना चाहता हूँ 
अपनी अलग पहचान। 
अटूट रिश्ते-नाते 
दोस्ती का संबंध 
जिसमें हो 
प्यार की भीनी-भीनी गंध।

आया नया विहान

राम राज सा धरा-धाम हो 
कान्हा का रंग-रास,
डाल-डाल पर फूल खिले 
रहे सदा मधुमास।

राग-द्वेष-घृणा हटे 
बहे प्रेम की गंगा,
रहे नहीं अवसाद धरा में 
मन हो सबका चंगा।

निर्भय हो जन-जन का मन 
बढ़े देश की शान,
दरवाजे पर दस्तक देने 
आया नया विहान।

यह रचना डॉ0 विवेक कुमार जी द्वारा लिखी गयी है।आपकी कादम्बिनी, अपूर्व्या, बालहंस, चंपक, गुलशन, काव्य-गंगा, हिंदी विद्यापीठ पत्रिका, र्जर- कश्ती, खनन भारती, पंजाबी-संस्कृति, विवरण पत्रिका, हिंदुस्तान, प्रभात खबर, राँची एक्सप्रेस,  दक्षिण समाचर, मुक्त कथन, वनवासी संदेश, प्रिय प्रभात, आदि पत्र-पत्रिकाओं में शताधिक रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं।प्रकाशित कृति:‘संजीवनी ’(कविता संग्रह).पुरस्कार/सम्मान -नेहरु युवा केन्द्र द्वारा निबंध प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार एवं दक्षिण समाचार, हैदराबाद बाल कहानी प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार आदि प्राप्त हो चुके हैं।
ई-मेल-vivekvictor1980@gmail.com,vivekvictor1980@rediffmail.com,पूरा पता-डॉ. विवेक कुमार,तेली पाड़ा मार्ग, दुमका-814 101.(झारखंड)

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