1
Advertisement

और कोई रास्ता भी नही (लघु कथा)

रामेती कुम्हारिन का भट्टा शहर के एक कोने में था।दीये भट्टे में पक रहे थे।उन धुएं की लकीरों में रामेती और उसके पति रतिराम के चेहरे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट दिखाई दे रहीं थी।
पिछली दीवाली का दर्द और डर अभी तक मन में समाया था।पिछली दीवाली पर रतिराम ने बैंक से कर्ज लेकर खूब सारे दीये और दीवाली के अन्य सामान बनाये थे।आशा थी दीये खूब बिकेंगे खूब लक्ष्मी बरसेंगी।पति रतिराम
चाइना सेल
चित्र सौजन्य - गूगल हिंदी 
बेटी मुनिया बेटा धन्नू और वह स्वयं दीये बेचने के लिए निकले बाजार में दुकानें लगाई ठेले पर फेरी लगाई परंतु किसी ने भी उनके दीये नहीं ख़रीदे।उनके बाजू वाली दुकान से चीनी दीये धड़ाधड़ बिक रहे थे।उनकी लागत एवं मुनाफे को मिलाकर उससे बहुत कम कीमत पर सुन्दर चीनी दीये लोगों के मन को भा रहे थे।

"बाजार में चीनी सामानों की बाढ़ आ रही है झालर दीये रंगबिरंगी मालाएं पिन से लेकर हवाई जहाज तक तो चीन से आकर बिक रहे हैं।"रतिराम ने ठेले से दीये उतारते हुए कहा।

रुआंसी मुनिया रामेती से पूछने लगी "माँ क्या अब हमारे दीये नहीं बिकेंगे,मैंने कितनी मेहनत से बनाये थे माँ,लोग हमारे दिए क्यों नहीं खरीद रहे हैं?"
रामेती क्या जबाब देती उसे तो खुद नहीं सूझ रहा था क़ि वह क्या करे।

धन्नू कहने लगा "माँ अब क्या में नहीं पढ़ पाउँगा ,पिताजी बैंक का कर्ज कैसे चुकाएंगे? हम साल भर क्या खाएंगे।
रामेती की आँखों में आंसू झिलमिला रहे थे।रतिराम भाव विहीन आँगन में फैले दीयों को देख रहा था।

अचानक मुनियाँ की आवाज़ से उसकी तन्द्रा टूटी"माँ इस दीवाली पर मैं नए कपडे लूँगी"
"और मैं खूब सारे फटाके"उधर से धन्नू चिल्लाया।
हाँ माँ वहाँ चाइना की सेल लगी है सब चीजें सस्ती मिल रही हैं" धन्नू ने आशा भरी निगाहों से रामेती को देखा।

"हां बेटा चलेंगे हम चाइना सेल में सस्ती चीजें खरीदने और कोई रास्ता भी तो नहीं है।" रामेती दोनों को दिलासा देते हुए अपने भट्टे की और बढ़ गई।

यह रचना सुशील कुमार शर्मा जी द्वारा लिखी गयी है . आप व्यवहारिक भूगर्भ शास्त्र और अंग्रेजी साहित्य में परास्नातक हैं। इसके साथ ही आपने बी.एड. की उपाध‍ि भी प्राप्त की है। आप वर्तमान में शासकीय आदर्श उच्च माध्य विद्यालय, गाडरवारा, मध्य प्रदेश में वरिष्ठ अध्यापक (अंग्रेजी) के पद पर कार्यरत हैं। आप एक उत्कृष्ट शिक्षा शास्त्री के आलावा सामाजिक एवं वैज्ञानिक मुद्दों पर चिंतन करने वाले लेखक के रूप में जाने जाते हैं| अंतर्राष्ट्रीय जर्नल्स में शिक्षा से सम्बंधित आलेख प्रकाशित होते रहे हैं | अापकी रचनाएं समय-समय पर देशबंधु पत्र ,साईंटिफिक वर्ल्ड ,हिंदी वर्ल्ड, साहित्य शिल्पी ,रचना कार ,काव्यसागर, स्वर्गविभा एवं अन्य  वेबसाइटो पर एवं विभ‍िन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाश‍ित हो चुकी हैं।आपको विभिन्न सम्मानों से पुरुष्कृत किया जा चुका है जिनमे प्रमुख हैं :-
 1.विपिन जोशी रास्ट्रीय शिक्षक सम्मान "द्रोणाचार्य "सम्मान  2012
 2.उर्स कमेटी गाडरवारा द्वारा सद्भावना सम्मान 2007
 3.कुष्ट रोग उन्मूलन के लिए नरसिंहपुर जिला द्वारा सम्मान 2002
 4.नशामुक्ति अभियान के लिए सम्मानित 2009
इसके आलावा आप पर्यावरण ,विज्ञान, शिक्षा एवं समाज  के सरोकारों पर नियमित लेखन कर रहे हैं |

एक टिप्पणी भेजें

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top