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पाँच का सिक्का
पाँच का सिक्का

पाँच का सिक्का जब से दस का सिक्का चलन में आ गया है, पाँच का सिक्का गरीबी रेखा के नीचे आ गया है। अब पाँच का सिक्का दान करते समय शर्म सी म...

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अलविदा
अलविदा

अलविदा प्रज्ञा की आँखें नीले आसमान को एकटक तक रहीं थी ।उसके पास मैं बैठा था लेकिन उसने एक बार भी मेरी तरफ नहीं देखा ।तभी उसे ओर ठंड महसू...

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कलयुग का सुख
कलयुग का सुख

कलयुग का सुख सोहनी ने दीपावली की रात को टोटका कर कुछ सिन्दूर अपनी पड़ोसन मोहनी के घर डाला सोचा उसकी कुछ परेशानी कम हो जायेगी। रात को ...

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सिसकते घाव
सिसकते घाव

सिसकते घाव खुले घावों में लहूरंजित छींटें, जि़न्‍दगी की  चादर पर मलहम की उम्‍मीद में, सिसकते – सिसकते आखि़र सो गए ।। ( उन ‘...

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कितनी सीता: कितनी अग्निपरीक्षा : कितनी भू-समाधि
कितनी सीता: कितनी अग्निपरीक्षा : कितनी भू-समाधि

कितनी सीता: कितनी अग्निपरीक्षा : कितनी भू-समाधि  रास्ते पर डिवाइडर के बाँयीं तरफ सड़क के किनारे -किनारे चलने और  जब तक गन्तव्य के लिए क...

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दिवाली की शुभकामनाएं
दिवाली की शुभकामनाएं

दिवाली की शुभकामनाएं हिंदीकुंज के पाठकों को दिवाली की शुभकामनाएं Lb3gk14Y3S18A52L05W6

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मंजिल कैसे पाये
मंजिल कैसे पाये

मंजिल कैसे पाये (How to Achieve Your Goals) जब मन में सच्ची भावना के साथ हमारा संघर्ष चलता है तो कोई भी मंजिल जीती जा सकती है लेकिन ह...

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सुनहरी मिट्टी
सुनहरी मिट्टी

सुनहरी मिट्टी  आज सुबह से ही रामदीन उदास था। दीपावली आने में केवल एक मास बचा था और अभी तक कहीं से भी दीये बनाने का ऑर्डर नहीं मिला था उस...

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अनजान मुहाफिज
अनजान मुहाफिज

अनजान मुहाफिज सम्पदा जैसे ही आॅफिस से बाहर निकली धीमी हवा ने धीरे - धीरे प्रचण्ड आंधी - तूफान का रूप ले लिया ।वह सड़क किनारे खड़ी होकर ट...

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ज्योतिर्मय हो दीवाली
ज्योतिर्मय हो दीवाली

ज्योतिर्मय हो दीवाली हम सब की पावन ज्योतिर्मय हो दीवाली। सब कड़वाहट पी लें हम हो मन खाली। जो भी कष्ट दिए तुमने मैंने सब माफ़ किये। ...

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पुरुषोत्तम
पुरुषोत्तम

पुरुषोत्तम रावण ने सीता को हरकर, जो किया, किया. लेकिन तुम थे - सियाराम, सीता के राम, तुम सीता को प्राणों से प्यारे थे, सीत...

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बचपन की दीवाली
बचपन की दीवाली

चलो बचपन की दीवाली मनाएंगे चलो बचपन की दीवाली मनाएंगे.... हर बार मन करता है इस बार की दीवाली  बचपन के घर में मनाएंगे जहां पुराना...

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दीपावली
दीपावली

दीपावली यह दीपावली कितना भाती है हर साल आती है खुशियाँ लाती है कतारों में जब दीपक जलते हैं दीपावली मन भर जाता है खुशियों से ...

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डॉ. महेंद्र भटनागर का राग- संवेदन
डॉ. महेंद्र भटनागर का राग- संवेदन

महेंद्रभटनागर स्वातंत्र्योत्तर हिन्दी-कविता के बहुचर्चित यशस्वी हस्ताक्षर हैं। उनकी कविता मानवतावाद से आध्यात्म की ओर उन्मुख है। नव-प्रगति...

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