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अजी सुनते हो  !

      साढ़े ग्यारह बज चुके थे अँधेरा अब भी चारों तरफ पसरा डरा रहा I ऊपर से बादलों की गड़गड़ाहट बड़ा भयंकर द्रश्य I 
      मोहन और उसके बीवी बच्चे अभी भी भूखे बैठे हुए थे I क्योंकि ? घर बारिश से पानी पानी हो गया I बड़ा बच्चा तो भूख से व्याकुल दीवाल से चिपका आँसू बहाता प्रार्थना कर रहा I 
      "अजी सुनते हो I " सुमित्रा ने कहा I 
      "बोलो भाग्यवान, क्या ?कहना चाहती हो I " मोहन ने जवाब दिया I 
      "हम भले ही भूखे रह जाएँ किन्तु बच्चों का भूख से बुरा हाल देखा नहीं जाता,हो सके तो कुछ इंतजाम कर दो I "
      इतनी बातें सुमित्रा की सुनकर मोहन की आँखें भर आईं I कमीज से आँखें पौंछता हुआ बाहर निकल गया I गाँव के मुखिया के घर पहुँचा I 
      "मुखिया जी थोड़ा खाना बचा हो तो मुझे दे दो,बच्चे भूखे हैं I "
      मुखिया जी के घर  ज्यादा खाना नहीं था,जो बचा था सब मोहन को दे दिया I मोहन ख़ुशी ख़ुशी सुमित्रा के पास जाकर बोले-
      "लो भाग्यवान खाना I "
      सुमित्रा ने दोनों बच्चों को खाना खिलाया और खुद हँसती,मुस्कुराती रही I  

रचनाकार परिचय 
नाम-  अशोक बाबू माहौर 
जन्म -10 /01 /1985 
साहित्य लेखन -हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं में संलग्न 
प्रकाशित साहित्य-विभिन्न पत्रिकाओं जैसे -स्वर्गविभा ,अनहदकृति ,सहित्यकुंज ,हिंदीकुंज ,साहित्य शिल्पी ,पुरवाई ,रचनाकार ,पूर्वाभास,वेबदुनिया,जखीरा आदि पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित I  
साहित्य सम्मान -इ पत्रिका अनहदकृति की ओर से विशेष मान्यता सम्मान २०१४-१५ से अलंकृति I 
अभिरुचि -साहित्य लेखन ,किताबें पढ़ना 
संपर्क-ग्राम-कदमन का पुरा, तहसील-अम्बाह ,जिला-मुरैना (म.प्र.)476111 
ईमेल-ashokbabu.mahour@gmail.com9584414669 ,8802706980 

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