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शराफत के खिलाफ

फकत खामोश है जुबाँ शराफत के खिलाफ।
मुकदमा दायर है फिर शराफत के खिलाफ।

हलफनामा दाखिल है मुनसफ के रूबरू,
गवाहोँ की तारीख है आज शराफत के खिलाफ।
राहुलदेव गौतम

सबूतोँ की अर्जियाँ कटघरे से बेदखल सब,
गुनाहगारोँ की पेशी है साब शराफत के खिलाफ।

पैरवी है कानून की कमजोर हैँ कागजात,
बाइज्जत बरी है मुल्जिमात शराफत के खिलाफ।

सजा ए दफा उम्रकैद है उसे क्योँ बेगुनाह है वो,
जुर्म मानहानि दावेँ करेगेँ शराफत के खिलाफ।

हमारी तरफ आ गई

उसकी तरफ की आँधियाँ हमारी तरफ आ गई।
वो मशहूर क्या हुए गुमनामी हमारी तरफ आ गई।

बस इतनी ही दरख्वास्त हैँ उनसे हमारा,
वो उम्र शाइस्ताँ मे जीलेँ बेकरारी हमारी तरफ आ गई।

तेरे जाहिद तो जाहिर है नही चाहिए तसदीकनामा,
कुरबत हो तेरी शुमार रूस्वाईयाँ हमारी तरफ आ गई।

दीद -ए -तर को तेरे इक पैगाम दिया है हमनेँ,
वाजिब निगेहबान तुम्हेँ मिला कयामते हमारी तरफ आ गई।

हम उस शिकस्त के अजीज है जो तेरे महफिल मेँ मिली,
अख्तियार वफाओँ मेँ नही सजाऐँ हमारी तरफ आ गई।

यह रचना राहुलदेव गौतम जी द्वारा लिखी गयी है .आपने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की है . आपकी "जलती हुई धूप" नामक काव्य -संग्रह प्रकाशित हो चुका  है .
संपर्क सूत्र - राहुल देव गौतम ,पोस्ट - भीमापर,जिला - गाज़ीपुर,उत्तर प्रदेश, पिन- २३३३०७
मोबाइल - ०८७९५०१०६५४

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