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अब्राहम लिंकन का संशोधित पत्र


सुशील कुमार शर्मा


अब्राहम लिंकन ने अपने पुत्र के शिक्षक को एक पत्र लिखा था जो बहुत प्रसिद्द है आप सब ने पढ़ा है लेकिन वह पत्र लिखने के बाद जब उन्होंने भविष्य की परिस्थितियों के बारे में विचार किया तो उन्होंने पुनः अपने पुत्र के शिक्षक को पत्र लिखा जो कुछ इस तरह है।  (एक समसामयिक व्यंग )

मैं जानता हूँ कि उसे सीखना होगा कि
गद्दी तक कैसे पहुंचा जाता है।
उसे सिखाइये कि संसार में हमेशा अन्याय करने वाले
ही सफल होते हैं अतः न्याय के पथ पर चलना मूर्खता है।
उसे बताइये कि राजनीति में कोई समाज सेवा के लिए नहीं आता है।
सिर्फ अपना और अपने वालों का भला ही राजनीति है।
हर समर्पित दिखने वाले राजनेता के पीछे एक स्वार्थ होता है।
अब्राहम लिंकन
उसे पूरा करने के लिए वह किसी भी हद तक जा सकता है।
उसे बताइये की हर दोस्त में एक जलन खोर दुश्मन होता है।
उसे इस जलन को और तीव्र करने के गुण सिखाइये।
उसे सिखाइये की हर हाल में कैसे जीतना है ?
हारने पर सबको कैसे सबक सिखाना है यह भी उसे सिखाइये।
उसे सिखाइये की सही प्रकृति प्रेम कैसा होता है ?
वनों को काट कर जमीनें कैसे बेचीं जाती है उसे बतायें।
उसे सिखाइये की नदी ,रेत ,कोयला ,पत्थरों ,खदानों को कैसे बेचना हैं।
उसे गुंडई के गुर सिखाइये क्योंकि राजनीति गुंडई से ही चलती है।
उसे बताइये की गुंडे पाल कर ही वह बड़ा राजनीतिज्ञ बन सकता है।
उसे पढ़ाइये कि पढाई लिखाई करना मूर्खो का काम है।
अगर सफल होना है तो चमचा गिरी का ज्ञान आवश्यक है।
उसे कक्षा में बताइये कि अगर किताबें पढ़ कर परीक्षा दोगे
तो सिर्फ पास होने लायक नंबर ला पाओगे लेकिन अगर
नक़ल माफिया को पैसे दोगे तो मेरिट में टॉप करोगे।
उसे बतायें की दूसरों पर अपने विचार कैसे थोपने हैं ?
अगर वो उसके विचारों से सहमत नहीं हैं तो ,
उन्हें कैसे नीचा दिखाया जाय यह उसे जरूर बताइये।
उसे बड़े लोगों की चाटुकारी करना सिखाइये साथ ही
अपने चमचों पर मेहरबानी करना भी बताईये।
उसे समझाएं की जो ज्यादा मीठा बोलता है वही अच्छा चमचा होता है।
उसे सिखाएं कि आज के ज़माने में दिखावा कितना महत्वपूर्ण है ?
"जो दिखता है वह बिकता है" सिद्धान्त की व्याख्या उसे समझाइये।
उसे तुलसी दास की चौपाई "समरथ को नहीं दोष गुसाईं "पर चलना सिखाइये।
उसे बताइये की शक्तिशाली भले ही गलत हो उसके साथ रहे।
और कमजोर भले ही सही हो उसे हमेशा दबाया जाये।
क्योंकि एक कमजोर को दबाने से सौ कमजोर अपने आप दब जाते हैं।
उसे दूसरों को नीचे गिरा कर उनकी छाती पर पैर रख कर आगे बढ़ना सिखाएं।
क्योंकि तभी वह सबसे आगे रह सकेगा और सफल कहला सकेगा।
उसे सिखाइये की दूसरों का अपने स्वार्थ के लिए कैसे प्रयोग किया जाता है।
अगर आप उसे सिखा सकते हैं तो सिखाइये कि दूसरों का मज़ाक कैसे उड़ाया जाता है।
क्योंकि तभी वह दूसरों को नीचा दिखाकर अपनी कमियां ढांक सकेगा।
उसे सिखाएं की अपनी आत्मा को कैसे मारा जाता है और
अपने आदर्शो को मोल भाव करके कैसे बेंचा जाता है ?
क्योंकि जबतक वह इन्हें नहीं मारेगा तब तक वह आगे नहीं बढ़ सकता।
उसे भींड़ की भेड़ो को हाँकना सिखाएं क्योंकि भेड़ों का नेता बनना आसान होता है।
उसे समय समय पर कैसे रंग बदलना है यह भी बताएं।
उसे साहसी नहीं हठधर्मी बनायें
उसे विनम्र नहीं उद्दंड बनायें।
उसे बहादुर नहीं अवसर वादी बनायें।
उसे सिखाएं की दूसरों के विश्वास को तोड़े बिना वह कुछ प्राप्त नहीं कर सकता।
हाँ उससे आप सम्मान की अपेक्षा बिलकुल न पालें।
उसे सिखाएं की अगर कोई शिक्षक उसके नाम के आगें
'सम्माननीय'शब्द न लगाए तो उसे कैसे अपमानित किया जाए।
हालाँकि यह कठिन कार्य है लेकिन आपको यह करना ही है।
ये सभी गुण आपको उसमे विकसित करने ही होंगे ,
वर्ना आप बहुत पछतायेंगे और इसकी सजा भी भुक्तेगें।

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