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सुपर पावर

शोध (research)से साबित हो गया है कि हर इंसान मे "सुपर पॉवर" होती है | ऐसी शक्तियां जिससे इंसान खुद-ब-खुद अपनी जिंदगी बदल सकता है। अपने जीवन को उन ऊचाइयों पर ले जा सकता है ,जिसका उसने कभी कल्पना भी न की होगी, या वह सोचता होगा की "काश मे भी कुछ ऐसा कर पाता।"
हमारा जीवन इक अद्भत कहानी ही तो है.. जो वक़्त-वक़्त पर कई मोड़ लेकर आता है , कभी दुःख तो कभी
सुपर पावर
सुख, कभी हार तो कभी जीत।
कभी सोचा है हमने की... ऐसा क्यूँ होता है कि जो हमारे साथ हमारे जैसे थे या कमतर थे वो आगे जाकर सफलता की ऊचाईयां कैसे छु गए। क्यूँ हम वही की वही रह गये या कुछ खास न कर सके।
क्या हम ये नहीं सोचते कि - 
१.सब भाग्य का खेल है।
२.उसको आर्थिक व सामाजिक सहयोग मिला होगा।
३..आत्म-बल (हिम्मत)की कमी।
पर वास्तव मे दोस्तों हम खुद ही अपने जीवन की कहानी लिखते है।परिस्थितियों का रोना रोने की बजाय हमे खुद को टटोलना चाहिये।हम गलत-सही,हार-जीत सब खुद की शक्तियो से ही करते है।
हर इंसान के अंतर्मन के दो पहलु होते है ,पहला (हीरो) नायक का  का...दुसरा (विलेन).खलनायक का।
नकारात्मक सोच के लिये या यूँ कहे कि कोई भी नया मार्ग ,कार्य चुनने या करने से रोकने वाला हमारा खुद का ही खलनायक मन होता है ..जो हमे बेवजह डरा देता है , घातक परिणाम हेतु आशंकित कर देता है ,फिर हमारे हौसले पस्त हो हम उसकी गिरफ़्त मे आकर हथियार डाल देते है कुछ भी करने से पहले ही।
पर यदि हमारा नायक(हीरो)..वाला सकारात्मक पक्ष बलवान,दृढ़ संकल्प लिये होता है तो कितनी भी वाधाये आये चाहे "बिजली कड़के या बादल बरसे" हमे आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता है ।
पर जब हम जी-जान से कोशिश पूरी शिद्दत से करने लगते है तो "पूरी की पूरी क़ायनात हमारा साथ देने लग जाती है।"जो कल तक इक सपना था  वो हमारे जीवन की "सुपर हिट"..कामयाब कहानी बना देता है.. मुझे आज अपनी ही लिखी पंक्तियाँ याद आ रही है.....

  • बगैर कोशिश के जहाँ मे कुछ नहीं मिलता..
  • न भूखे को रोटी न प्यासे को पानी है मिलता।
  • हर घडी हर सूरत कर्म तो करना पड़ता है...
  • क्यूंकि दरिया खुद कभी समंदर से जाकर नहीं मिलता।।
यह रचना प्रीति जैन(परवीन)द्वारा लिखी गई है।आप स्वतंत्र रूप से,काव्य,लेख,संस्मरण,कहानी लिखती रही है।(हमारा आत्म-मंथन)..public group की संपादक है।लोकजंग,समाचार जगत पत्रिका व विश्व -गाथा,कलम के कदम, सत्यम प्रभात आदि पुस्तको आदि मे रचनाये छपती रही है।।

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