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   मेरी प्रिय पुस्तक
(My Favorite Book)

मुझे श्रेष्ठ पुस्तकों से अत्यधिक प्रेम है .यों मुझे अनेक पुस्तकें पसंद हैं ,लेकिन जिसने मुझे सबसे अधिक प्रभावित किया ,वह है तुलसीदास जी की रामचरितमानस . 

पुस्तक का विषय - 

"रामचरितमानस" में दशरथ पुत्र राम की जीवन गाथा का वर्णन है .श्रीराम के जीवन की प्रत्येक लीला मन को
रामचरितमानस
रामचरितमानस
भाने वाली है .उन्होंने किशोरावस्था में ही राक्षसों का वध और यज्ञ -रक्षा का कार्य जिस कुशलता से किया है ,वह मेरे लिए अत्यंत प्रेरणादायक है .उनकी वीरता और कोमलता के सामने मेरा ह्रदय श्रद्धा से झुक जाता है .

मार्मिक स्थल :

रामचरितमानस में मार्मिक स्थलों का वर्णन तल्लीनता से हुआ है .राम -वनवास ,दशरथ -मरण ,सीता हरण ,लक्ष्मन -मूर्छा ,भरत-मिलन आदि के प्रसंद दिल को छूने वाले हैं .इन अवसरों पर मेरे नयनों में आंसुओं की धारा उमड़ आती है .विशेष रूप में राम और भरत का मिलन ह्रदय को छूने वाला है . 
आदर्श व्यवहार का चित्रण - इस पुस्तक में तुलसीदास ने मानव के आदर्श व्यवहार को अपने पात्रों के जीवन में साकार होते दिखाया है . राम मर्यादा पुरषोत्तम हैं .वे आदर्श राजा ,आदर्श पुत्र ,आदर्श पति और आदर्श भाई हैं . भरत और लछमन आदर्श भाई हैं .उनमें एक दूसरे के लिए सर्वस्व त्याग की भावना प्रबल है .सीता आदर्श पत्नी हैं .हनुमान आदर्श सेवक है .पारिवारिक जीवन की मधुरता का जैसा सरस वर्णन इस पुस्तक में हैं ,वैसा अत्यंत कहीं नहीं मिलता है . 

प्रेरणादायी पुस्तक :-

यह पुस्तक केवल धार्मिक महत्व की नहीं है .इसमें मानव को प्रेरणा देने की असीम शक्ति है .इसमें राजा ,प्रजा ,स्वामी ,दास,मित्र,पति,नारी,स्त्री,पुरुष -सभी को अपने जीवन उज्ज्वल बनाने की शिक्षा दी गयी है .राजा के बारे उनका वचन है - 
जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी .सो नृप अवस नरक अधिकारी ..

तुलसीदास जी ने प्रायः जीवन के सभी पक्षों पर सूक्तियाँ लिखी हैं .उनके इन अनमोल वचनों के कारण यह पुस्तक अमरता को प्राप्त हो गयी है . 

भाषा शैली - 

रामचरितमानस की भाषा अवधि है . इसे दोहा -चौपाई शैली में लिखा गया है . इसका एक -एक छंद रस और संगीत से परिपूर्ण है .इसकी रचना को लगभग ४०० वर्ष पूरे हो चुके हैं .फिर भी आज इसके अंश मधुर कंठ में गाए जाते हैं . 

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