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      विवाह 

विवाह
विवाह
विवाह हिन्दू संस्कृति में सृष्टि को आगे बढाने हेतु -- जो रीति-रिवाज ,सामजिक मूल्यों का एक धरोहर के रूप में,इतनी प्राचीन संस्कृति का निर्वाह आज भी हो रहा है | बड़े गर्व की बात है किन्तु पिछले कुछ सालों में इस संस्कृति में कुछ-कुछ खोट आ रही है | आज हम पर हमारी संस्कृति की अपेक्षा हमारे स्वार्थ हावी हो रहे है | इस कारण से जो हमारी संस्कृतियाँ पुरे विश्व में पूजी जाती थी या यूँ कहा जाए तो कोई कोई अतिश्योक्ति न होगी कि हमे हमारे रीति - रिवाज गौण लगते है किन्तु इन्ही रीतियों को अन्य देशों में सराहा जाता हैं | और हम उस संस्कृति को अपने यहाँ हावी होने दे रहे है जो हमें अपनी जड़ों को उखाड फेंकने की तालीम देती है --- तलाक |

     विवाह हमारे यहाँ कभी भी व्यक्तिगत नहीं रहा है | हमारे यहाँ विवाह दो व्यक्तियों का नहीं वरन दो परिवारों का होता हैं | विवाह दो व्यक्तियों को तो आपस में बांधता ही है साथ-ही-साथ दो परिवारों को भी जोड़ता हैं |समाज को इस बात की सच्चाई को जानना होगा कि आज नौजवान शादी करने के बाद छोटी-छोटी बातों को तूल देकर किस प्रकार अपने सम्बन्ध को कलंकित कर रहे हैं | तो विवाह जैसे पवित्र बंधन को कलंकित न कर किस प्रकार विवाह में बंधने पर इस रिश्ते की मर्यादा बनाए रखे | विवाह को विवाह पवित्र बंधन ही रखे |
            

       पवित्र बंधन होता है विवाह 
        बिना शर्त का रिश्ता विवाह 
        दो अजनबियों का होता विवाह 
         विश्वास की डोर से बंधा विवाह |
                                             लड़की से लडके का होता विवाह 
                                                 जिम्मेदारी का अहसास कराता विवाह 
                                                लड़की को कई रिश्तों में बांधता विवाह 
                                                बहु,भाभी,चाची,मामी कि सौगात देता विवाह 
कुछ रिश्तों में जिम्मेदारी देता विवाह 
तो कुछ रिश्तों से खट्टी-मीठी यादें बनाता विवाह 
सभी रिश्तों को संभालने की ताकत देता विवाह 
अल्हड़पन से जिम्मेदार बनता विवाह |

यह रचना जयश्री जाजू जी द्वारा लिखी गयी है . आप अध्यापिका के रूप में कार्यरत हैं . आप कहानियाँ व कविताएँ आदि लिखती हैं . 

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  1. बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति...

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  2. lajavab, vivah ek pavitra bandhan hain jo har kisi ne dil ne nibhana chahiye, pati aur patni ek gadi ke do chakke hain dono ko eksath hi chalna hota hain esme se agar ek bhi chakka chut gaya to gadi nahi chalengi.

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