1
Advertisement

    मासूम चेहरा 

"अरे अब तो अपने बेटे का ब्याह कर दे " सविता ने नमिता से कहा |
"हाँ चल तू ही कोई लड़की दिखा दे |" नमिता ने जवाब दिया |
"एक लड़की तो है, लेकिन तेरे समाज की नहीं है | सविता बोल पड़ी |
नमिता थोडा सोच कर कहने लगी "ठीक है,लड़की की कौनसी जात होती है | वो तो धरती के समान है जिसने बीज डाला,पानी दिया उसकी ही हो जाती है |"
"तो मैं बात चलाऊं " सविता ने पूछा |
    मासूम चेहरा
चित्र साभार - गूगल.कॉम 
"हाँ यदि वे तैयार हो तो ....... मुझे कोई आपत्ति नहीं" नमिता ने कहा |
  सविता ने बात कर देखने दिखाने का कार्यक्रम बना दिया | जिससे लडके-लड़की एक दूसरे को देख ले | नियत दिन दोनों ने एक दूसरे को देखा,परिवार  के लोग भी आपस में मिले तथा घर जाकर जवाब देंगे कहकर चले गए | नमिता ने सविता से लड़की और उसके परिवार के बारे में पूर्ण जानकारी ली | पुत्र रजत से पूछा तथा शादी के लिए हाँ कह दी |  सविता ने लड़की के तारिफो के पुल बांधे थे | विवाह एक सादे ढंग से हो गया तथा प्रिया रजत अब दोनों एक दूसरे के जीवन संगी बन गए | दो-तीन महीने बड़े आराम से गुजरे | सभी प्रिया को  पसंद करने लगे प्रिया  नमिता के घर की सदस्य ही हो, ऐसे घुलमिल गई |
          प्रिय ने अपनी सेवा,हँसमुख स्वाभाव और हर कार्य की जिम्मेदारी लेने की प्रवृत्ति ने नमिता के परिवार के लोगों में  भी उसे खासी लोकप्रिय बना दिया | नमिता भी खुश थी कि "इस घर में अकेली रहकर मैं ऊब गई,साथी के रूप में बहू का साथ उसे अच्छा लग रहा था |"
               धीरे-धीरे प्रिया रजत पर दबाव बनाने लगी कि मुझे अलग घर में रहना है | जब रजत ने यह सुना तो वह अचरज में पड़ गया | ये दोगली औरत सभी के बीच में मुझे और मेरे परिवार के लोगों को समाज में नीचा दिखाना चाहती है |
      रजत ने पूछा "तुम्हे परेशानी क्या है ?" मेरी माँ -बाबूजी को मैं जानता हूँ, वो तुम्हें मुझसे भी ज्यादा मान देते है |
  "नहीं मैं इनके साथ रहते -रहते ऊब चूकी हूँ,रोज सुबह उठकर अच्छी बहू का नाटक करते -करते मैं थक गई हूँ | तुम्हे यदि मेरे साथ रहना हैं तो अलग घर का बंदोबस्त करना पड़ेगा | वरना मैं अपने माता पिता के घर चली जाऊँगी |"
   रजत कहाँ खामोश बैठने वाला था | उसने तुरंत कहा "कल कि जाती आज चली जाओ |"

क्रमश:

यह रचना जयश्री जाजू जी द्वारा लिखी गयी है . आप अध्यापिका के रूप में कार्यरत हैं . आप कहानियाँ व कविताएँ आदि लिखती हैं . 

एक टिप्पणी भेजें

  1. achchi kahani, aajkal ye kahani sabhi gharo me dekhane ko milati hain. lekin agar koi samsya ho to sabhi ko baat karke use samsya ka hal nikalna honga thoda thoda sabhi ko badalana honga, tabi parivar ek sath rah payenga.
    dhanyvad.........

    उत्तर देंहटाएं

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top