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तुम कहाँ से आई 


आँखों का नूर बनाकर 
रखा हमेशा 
साथ अपने 
जिसने पथ का बोध कराया 
आज उसी माँ से कहते हो 
तुम कहाँ से आई I
अशोक बाबू माहौर
अशोक बाबू माहौर 
कड़ी धूप,उमस से बचाकर 
छाँवों का तीर दिखाया 
एक कतरा आँसू का 
न गिरने दिया
न फूटने दिया बादल दुःख का 
आज उसी माँ से कहते हो 
तुम कहाँ से आई I 
जख्मों पर मरहम लगाकर 
पी जाती दुःख दरिया 
भूखी बिलखती रहती खुद 
न रहने दिया प्यासा कभी 
घुट -घुट कर जीती रहती 
आज उसी माँ से कहते हो 
तुम कहाँ से आई I 
होंठों पर अपने दबा लेती 
भीषण आँधी,अँगारे भी 
न उड़ने देती,जलने देती 
ममता की परछाई को 
न समझ पाते हम उसकी ममता 
आज उसी माँ से कहते हो 
तुम कहाँ से आई I  

यह रचना अशोक बाबू माहौर जी द्वारा लिखी गयी है . आपकी विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी है . आप लेखन की विभिन्न विधाओं में संलग्न हैं . संपर्क सूत्र -ग्राम - कदमन का पुरा, तहसील-अम्बाह ,जिला-मुरैना (म.प्र.)476111 ,  ईमेल-ashokbabu.mahour@gmail.com

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