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गर्मी

भड़का सूरज लू चलती है
धरती भी धूं धूं जलती है
घर से बाहर को न जाएँ
दिनभर ए सी खूब चलाएं
आइसक्रीम को जी है करता
पानी पी पी पेट न भरता
गर्मी
मच्छर गर्मी में इतराऐं
पी पी अपना खून भड़ायें
फ़लों का राजा मुझको भाता
छुपके माँ से जी भर खाता
वैसे गर्मी मुझे न भाती
पर स्कूल से छुट्टी यही दिलाती
नाना नानी के घर जाना
दिनभर मस्ती खूब उड़ाना
हर मौसम का अपना रंग है
क्यों प्राणी गर्मी से तंग है
आओ कर लें इस से यारी
यह अपनी है सखी प्यारी

ले चल मांझी

धीमे धीमे ले चल मांझी
बबिता 'कोकिल'
बबिता 'कोकिल' 
नैया को उस पार रे मांझी
रैन अँधेरी ये पुरवैया
डगमग है पतवार रे मांझी

सागर की लहरों में हलचल
तन में हलचल मन में हलचल
कण कण को झकझोर रहा है
उछल उछल कर ज्वार रे मांझी

तेरी इच्छा बहुत सबल है
सागर की लहरें तो छल हैं
हिम्मत से तू कर जाएगा
तूफानों को पार रे मांझी

धीमे धीमे ले चल मांझी
नैया को उस पार रे मांझी

यह रचना बबिता कपूर "कोकिल " जी द्वारा लिखी गयी है . आपकी अधिकतर रचनाएं पंजाबी भाषा में हैं। पंजाब से प्रकाशित होने वाली पुस्तिका 'वक्त दे बोल' में आपकी  लिखी कविताएं एवम् ग़ज़लें प्रकाशित होती रहती हैं।आपके  कहे गए शेर, 'हिंदवी' नामक उर्दू वेबसाइट पर प्रकाशित होते रहते हैं।इसके इलावा चंडीगढ़ में 'रीडर्स एंड राइटर्स सोसाइटी ऑफ़ इंडिया' एवं 'अभिव्यक्ति' नामक साहित्यिक संस्थाओं से आप  जुडी हुई हैं  तथा इनके द्वारा आयोजित गोष्ठियों में निरन्तर हिस्सा लेती हैं। 'शिरोमणि पंजाबी लिखारी सभा पंजाब (रजिस्टर्ड)' द्वारा प्रकाशित काव्य संग्रह में आपकी ग़ज़लें भी प्रकाशित हो रही हैं।
संपर्क सूत्र - बबिता 'कोकिल' ,3104/1 सेक्टर 38 डी,चंडीगढ़ ,8054303079 (मोबाइल नम्बर)

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