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 चंदामामा जी


चंदामामा जी
रातों को जब आते हो
हमको चाँदनी रात दिलाते हो
आपका खूबसूरत मुखड़ा
सच्ची राह दिखाते हो
रात के राजा
Chandamama
सबकेआँखों के तारा
किससे मिलने आते हो?
इतने सजधज के
धवल कीर्ति लिये
आँखों को मचलाते हो
तुम ना बतलाओ
लेकिन
तुम चंदामामी से
रात रात फुसुर फुसुर
बतियाते हो

(2) फूल

फूल
तुम कितने अच्छे हो
भोली भाली सूरत लिये
किसका हार बनोंगे?
रात में जब खिलते हो
होठों सी मुश्कान लिये
खुशबू बिखेरते हो
कोमल हो कितनी
एक दिन मेरे घर आना
मेरी मम्मी का गजरा बन जाना. 


यह रचना जयचंद प्रजापति कक्कू जी द्वारा लिखी गयी है . आप कवि के रूप में प्रसिद्ध हैं . संपर्क सूत्र - कवि जयचन्द प्रजापति 'कक्कू' जैतापुर,हंडिया,इलाहाबाद ,मो.07880438226 . ब्लॉग..kavitapraja.blogspot.com

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