1
Advertisement

नारी : भारत की प्रगति - भारत की आत्‍मा

भारत की प्रगति एक ऐसी आधुनिक बाला है,
जो गिट-पिट बोलती है, चहकती है,
लरजती है, नाइट क्‍लब जाती है,
शेयर-बाजार के हिचकोले खाती है;
फ़ैशन के रैम्‍प पर,
ज़ीरो फि़गर में
पुष्पलता शर्मा
कैट-वॉक करती है,  और
रैम्‍प के पीछे जाकर
ग्‍लूकोज़ लेती है
इन्‍स्‍टेण्‍ट एनर्जी के लिए;

और भारत की  आत्‍मा
ऐसी ग्रामीण अल्‍हड़ बाला है,
जो नदी, झरनों सी बेखौफ़ अगड़ाई लेती है,
चहकती है चिडि़यों सी,
शरमाती है छुई-मुई बेल सी;
पहाड़ी झरनों पर अठखेलियों का
स्‍नान करती,
जीवन-संघर्ष के पथ पर
शारीरिक श्रम के प्रतिमान रखती;
सुडौल, सम्‍पुष्‍ट;
सशक्‍त भारत की तस्‍वीर-
 यह चलती-फिरती
‘भारतीय संस्‍कृति’  है ।।
  -----------


यह रचना पुष्पलता शर्मा 'पुष्पी' जी द्वारा लिखी गयी है . आपकी आपकी विभिन्‍न पत्र-पत्रिकाओं में सम-सामयिक लेख ( संस्‍कारहीन विकास की दौड़ में हम कहॉं जा रहे हैं, दिल्‍ली फिर ढिल्‍ली, आसियान और भारत, युवाओं में मादक-दृव्यों का चलन, कारगिल की सीख आदि ) लघुकथा / कहानी ( अमूमन याने....?, जापान और कूरोयामा-आरी, होली का वनवास आदि ), अनेक कविताऍं आदि लेखन-कार्य एवं अनुवाद-कार्य प्रकाशित । सम्‍प्रति रेलवे बोर्ड में कार्यरत । ऑल इंडिया रेडियो में ‘पार्ट टाइम नैमित्तिक समाचार वाचेक / सम्‍पादक / अनुवादक पैनल में पैनलबद्ध । कविता-संग्रह ‘180 डिग्री का मोड़’ हिन्‍दी अकादमी दिल्‍ली के प्रकाशन-सहयोग से प्रकाशित हो चुकी है ।

एक टिप्पणी भेजें

  1. पुष्पलता जी, आपकी नारी ये रचना भारत की नारी की पहचान दिलाने वाली हैं, जैसे जैसे दुनिया बदलती जा रही हैं वैसे वैसे नारी का रूप भी बदलता जा रहा हैं लेकिन इस रूप बदले नारी में आज भी कही न कही अपनी संस्कृति जिंदा हैं.

    उत्तर देंहटाएं

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top