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एक औरत करती पूजा 

भोर
सुनहरे रवि से पहले
औरत
मंदिर जाती
चित्र साभार - pinterest.com
करती पूजा अर्चना,
चरणों में
प्रभु के
माथा लगाती I
दुखित मन उसका
कहना चाहती
माँगती वर
तनिक सा
विनम्र सिर
हथेली पसारती
किन्तु बेशर्म वक्त
दे जाता दगा
ताला जड़कर
जीभ पर I
वह
खड़ी रह जाती
थकी हुई
शाम सी,
भक्ति गर उसकी अव्वल
रंग भर देगी,
हँसकर,वर क्या ?
प्रभु
हाथ अचम्भित
रख देंगें सिर पर I


यह रचना अशोक बाबू माहौर जी द्वारा लिखी गयी है . आपकी विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी है . आप लेखन की विभिन्न विधाओं में संलग्न हैं . संपर्क सूत्र -ग्राम - कदमन का पुरा, तहसील-अम्बाह ,जिला-मुरैना (म.प्र.)476111 ,  ईमेल-ashokbabu.mahour@gmail.com मोबाइल - 9584414669 

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