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आशुतोषी माँ नर्मदा
(एक भक्त की क्षमा याचना )

सुशील शर्मा 

आशुतोषी माँ नर्मदा अभय का वरदान दो।
शमित हो सब पाप मेरे ऐसा अंतर्ज्ञान दो।
विषम अंतर्दाह की पीड़ा से मुझे मुक्त करो।
हे मकरवाहनी पापों से मन को रिक्त करो।
चित्र साभार - www.bhaktisangrah.com
मैंने निचोड़ा है आपके तट के खजाने को।
आपको ही नहीं लूटा मैने लूटा है ज़माने को।
मैंने बिगाड़ा आवरण ,पर्यावरण इस क्षेत्र का।
रेत लूटी और काटा जंगल पूरे परिक्षेत्र का।
मैंने अमित अत्याचार कर दुर्गति आपकी बनाई है।
लूट कर तट सम्पदा कब्र अपनी सजाई है।
सत्ता का सुख मिला मुझे आपके आशीषों से।
आपको ही लूट डाला मिलकर सत्ताधीशों से।
हे धन्यधारा माँ नर्मदे अब पड़ा तेरी शरण।
माँ अब अनुकूल होअो मेरा शीश अब तेरे चरण।
उमड़ता परिताप पश्चाताप का अब विकल्प है।
अब न होगा कोई पाप तेरे हितार्थ ये संकल्प है।
आशुतोषी माँ नर्मदा अभय का वरदान दो।
शमित हो सब पाप मेरे ऐसा अंतर्ज्ञान दो।

यह रचना सुशील कुमार शर्मा जी द्वारा लिखी गयी है . आप व्यवहारिक भूगर्भ शास्त्र और अंग्रेजी साहित्य में परास्नातक हैं। इसके साथ ही आपने बी.एड. की उपाध‍ि भी प्राप्त की है। आप वर्तमान में शासकीय आदर्श उच्च माध्य विद्यालय, गाडरवारा, मध्य प्रदेश में वरिष्ठ अध्यापक (अंग्रेजी) के पद पर कार्यरत हैं। आप एक उत्कृष्ट शिक्षा शास्त्री के आलावा सामाजिक एवं वैज्ञानिक मुद्दों पर चिंतन करने वाले लेखक के रूप में जाने जाते हैं| अंतर्राष्ट्रीय जर्नल्स में शिक्षा से सम्बंधित आलेख प्रकाशित होते रहे हैं | अापकी रचनाएं समय-समय पर देशबंधु पत्र ,साईंटिफिक वर्ल्ड ,हिंदी वर्ल्ड, साहित्य शिल्पी ,रचना कार ,काव्यसागर, स्वर्गविभा एवं अन्य  वेबसाइटो पर एवं विभ‍िन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाश‍ित हो चुकी हैं।
आपको विभिन्न सम्मानों से पुरुष्कृत किया जा चुका है जिनमे प्रमुख हैं :-
 1.विपिन जोशी रास्ट्रीय शिक्षक सम्मान "द्रोणाचार्य "सम्मान  2012
 2.उर्स कमेटी गाडरवारा द्वारा सद्भावना सम्मान 2007
 3.कुष्ट रोग उन्मूलन के लिए नरसिंहपुर जिला द्वारा सम्मान 2002
 4.नशामुक्ति अभियान के लिए सम्मानित 2009
इसके आलावा आप पर्यावरण ,विज्ञान, शिक्षा एवं समाज  के सरोकारों पर नियमित लेखन कर रहे हैं |

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