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शिक्षक दिवस 

पाँच सितम्बर का दिन भारत में बच्चों के लिए अत्यंत विशेष महत्व का दिन होता है . यह श्री राधाकृष्णन जी का जन्म दिवस होता है . जो न केवल भारत के राष्ट्रपति थे बल्कि एक महान शिक्षक भी थे . 
शिक्षक
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वह ऐसा दिन होता है जिसकी स्कूली छात्र कई दिनों पहले से प्रतीक्षा करते हैं . इसका कारण यह है कि यह विशेष दिन वर्ष में केवल एक बार आता है और इस दिन उन्हें अपनी इच्छानुसार अपने प्रेम और कृत्यज्ञता को अभिव्यक्त करने का अवसर मिलता है . शिक्षकों के लिए यह अत्यंत सुखद अनुभव होता है . इस दिन अधिकांश शिक्षक यह महसूस करते हैं कि हालांकि उन्हें इस पेशे में रुपये -पैसे के नज़रिए से भौतिक लाभ ज्यादा नहीं मिलते हैं किन्तु उन्हें सैकड़ों -हज़ारों छात्रों की कृतज्ञता और शुभकामनाएं अवश्य प्राप्त होती हैं ,जो सचमुच में महान उपहार होता है .

विभिन्न आयोजन 

इस मौके पर अधिकाँश विद्यालय रंगीन पताकाओं ,गुब्बारों और फूलों से सजे होते हैं .अब तो बाज़ार में इस अवसर के लिए विशेष रूप से छपे शिक्षक दिवस कार्ड भी खूब मिलते हैं . कई कार्डों की डिजाईन बहुत अच्छी होती है और उनमे शिक्षण व्यवसाय के लिए आदर और प्रशंसा की ऐसी सुन्दर भावाभियक्ति होती है जो हमारे दिल को छु जाती है . छात्र सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत करते हैं . वे अपने शिक्षकों को प्रसन्न करने के लिए गाते हैं और नाचते हैं और अपने हास्य प्रहसनों से शिक्षक समुदाय को हंसा -हँसाकर लोट - पोट कर देते हैं . यह ऐसा दिन होता है ,जब शिक्षक चाक ,श्यामपट और पाठों की जिम्मेदारी से मुक्त होकर विश्राम करते हैं जबकि छात्र स्कूल में उनकी जिम्मेदारियां निभाते हैं . 

शिक्षक का मान-सम्मान

शिक्षक और छात्र के बीच का रिश्ता इतना खूबसूरत होता है जिसे शब्दों में परिभाषित नहीं किया जा सकता . जब बच्चा अपने बढ़ने के बर्षों से होकर गुजरता है तो वह कई बार प्रसन्न होता है ,कई बार परेशानी या कठिनाई में पड़ता है और मार्गदर्शन के लिए अपने शिक्षकों पर निर्भर करता है . इस प्रक्रिया में छात्र और शिक्षक के बीच एक ऐसा बंधन जुड़ जाता है जिसका प्रभाव छात्र के जीवन पर अत्यंत लम्बे समय तक रहता है . अतः शिक्षक न केवल छात्रों के जीवन में बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं .  

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  1. गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्‍वरः । गुरु साक्षात्‌ परब्रह्म तस्मै श्रीगुरुवे नमः ॥

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