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                           हंगामा क्यों बरपा हैं ?

हंगामा ,हंगामा,हंगामा........ कितना हंगामा मचा है | कोई सहयोग दे रहा हैं, कोई विरोध में खड़ा हैं | लेकिन एक बात है सभी कुछ न कुछ कर रहे हैं,कह रहे हैं | अगर किसी ने चील उड़ाई तो वहाँ पर कहा जाएगा कि भैंस उडी है | अब क्या करें हम भारतीयों की फितरत जो ऐसी है | हमें करना कुछ नहीं है कहना है --- बस कहते जा रहें हैं | देश की सरकार ने देश के लिए कुछ किया तो उसका कोई जिक्र नहीं है और वहीँ पर कहीं कुछ रहा गया तो विरोधी और सहयोगी में विवाद शुरू |
     अब अगर ६५ साल की सरकार की तरफ से कोई पहल नहीं हुई देश को आगे बढ़ाने में तो दो साल की सरकार से बड़ी बड़ी अपेक्षाएँ – क्या वाज़िब लगता है | 
      समझ नहीं आता कि विरोधी लोग देश के लिए सोचते है या अपना फ़ायदा | जितना काम इस दो साल की सरकार में हुआ यदि उसका आंकलन किया जाय तो मुझे लगता है कि इस सरकार को यदि हम फिर अवसर देंगे तो हमारा देश भी शायद शीर्ष पर खड़ा होने की क्षमता रख सके | यदि विरोधी भी अपने लिए न सोचकर देश के लिए सोचे तो .......... लेकिन नहीं वह तो सिर्फ अपने लिए ज्यादा सोचता है | संसद भवन में अपना परिचय विरोधी बहुत बढ़िया ढंग से दे रहा है काम में रुकावट डाल कर | 
     कई बार मैं सोचती हूँ कि भारत एक विशाल प्राचीन देश है | कई संस्कृतियाँ यहाँ पली हैं, आगे बढ़ी हैं | दुसरे देशों की अपेक्षा हमारी संस्कृति की जड़े गहरी पैठी हुई है | प्राकृतिक सम्पदाओं का भण्डार भरा पड़ा है | इन सबके बावजूद हमारा देश पिछड़ा है | प्रश्न आता है क्यों? क्या कारण है? हम कभी इन प्रश्नों पर सोचते हैं | शायद ही कोई सोचता होगा | हाँ कहीं यदि हमें बोलने का मौका मिलता हैं तो बोलते जरुर हैं | बस बोलते हैं , करते कुछ नहीं | 
          मैं व्यक्तिगत तौर पर इस बात के लिए बहुत सोचती हूँ | यदि कभी मौका मिलता है तो चर्चा भी करती हूँ | जो परिणाम मेरे सामने आया वह यह है कि हमारे देश के लोगों को देश के लिए सोचने की फुर्सत नहीं हैं | इस देश के कुछ तबकों के पास इतना पैसा है कि वह  अपने व्यक्तिगत जीवन और अपनी धरोहर को सम्भालने में ही जीवन बिता देता है | कुछ तबके को सरकार की तरफ से इतनी सुविधाएँ मिलती है वह अपनी तरफ से देश के हित के लिए कुछ सोचता ही नहीं हैं और एक तबका ऐसा हैं जो अपने परिवार को पालने के अलावा और ‘लोग क्या कहेंगे’ में ही जीवन बिता देता हैं | जब देश के ये तीनों तबके अपने बारे में सोचने के सिवाय कुछ और नहीं सोच सकते तो भला देश आगे कैसे बढ़ेगा | देश का नौजवान बेकार हैं | अपने ज्ञान के आधार पर उसने जो नौकरी की अपेक्षाएँ की हैं वह उसे मिलती नहीं हैं | बस अपनी शक्ति को नौजवान यूँ ही बेकार खो देते हैं | 
        सरकार का जो इतना विरोध हो रहा है, सोशल मिडिया पर लोग जो कमेंट्स लिखते हैं, जैसे मोदी ने यही कपड़े क्यों पहने,उनकी यात्राओं को लेकर और न जाने ऐसी कितनी ही घटिया किस्म की बातें | इस तरह की नकारात्मक बातों को लोगों के बीच रखना क्या ये ठीक बात है? बेहतर है लोग अपना दिमाग लगाकर सोचे और देश को आगे बढ़ाने में अपना सहयोग दें | मेर सोचना है कि हमें ऐसी सरकार का चुनाव करना चाहिए जो देश को आगे बढ़ाने में विशवास रखती हो | यदि हम भी जापानियों और चीनियों की तरह अपने देश को मुख्य समझकर कुछ कार्य करेंगे तो निश्चय ही देश तरक्की करेगा | 
                देश की तरक्की ,हमारी तरक्की, जन जन की तरक्की | 
                    जय हिन्द,जय हिन्द,जय हिन्द | 



यह रचना जयश्री जाजू जी द्वारा लिखी गयी है . आप अध्यापिका के रूप में कार्यरत हैं . आप कहानियाँ व कविताएँ आदि लिखती हैं .

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