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आज मुक्त हूँ मैं

1. आज मुक्त हूँ मैं..........

ज़ीर्ण-शीर्ण, क्षत-विक्षत,
जैसा भी हूँ,
आगम-निगम से आज मुक्त हूँ मैं ।

गूढ़-मूढ़, घायल-आहत,
जैसा भी हूँ,
आसक्त-विरक्त से आज मुक्त हूँ मैं ।

निर्धन-निर्बल, विषय-विरक्त,
जैसा भी हूँ,
विस्मय-निर्णय से आज मुक्त हूँ मैं ।

लुप्त-रिक्त, खिन्न-भिन्न,
जैसा भी हूँ,
आदि-अंत से आज मुक्त हूँ मैं ।

विकृत-दूषित, बदरंग-बदमस्त,
संदीप श्याम शर्मा 
जैसा भी हूँ,
विरह-मिलन से आज मुक्त हूँ मैं ।

स्थूल-धूल, नग्न-भग्न,
जैसा भी हूँ,
जीवन-मरण से आज मुक्त हूँ मैं ।

2. तुम संग, तुम बिन

तुम संग जीवन मीठा अमरस,
तुम बिन पानी फीका फीका,
तुम संग जीवन समरवीर सा,
तुम बिन खाली तरकश जैसा ।

तुम संग जीवन हरित सावन है,
तुम बिन उपवन उजड़ा उजड़ा,
तुम संग जीवन सर्द हिमालय,
तुम बिन थार मरूस्थल जैसा ।

तुम संग जीवन स्वप्नलोक है,
तुम बिन अनुभव जले भुने से,
तुम संग जीवन चलता पहिया,
तुम बिन स्थिर पत्थर जैसा ।

तुम संग जीवन सरल सुगम है,
तुम बिन सब कुछ उलझन उलझन,
तुम संग जीवन शाही महल सा,
तुम बिन भग्न खंडहर जैसा ।

3. अतिनाटकीयता

अब दुनिया बदल चुकी है दोस्तों,
वो बात पारसी थिएटर के चरम की थी,
सिर्फ़ डॉयफ्रेम से चिल्लाने,
हवा में हाथ पाँव मारने,
चेहरा बिगाड़ने और
आडम्बर को परोसने का वक़्त गया।
अभी अतिनाटकीयता ना मंच पर अच्छी लगती है
और ना ही असल ज़िन्दगी में ।

सीधे आओ अपनी बात कहो,
हाँ करो, ना करो,
आगे निकल जाओ,
दूसरों को आगे निकलने दो,
ज़िंदा रहो, मर जाओ,
जीने दो, जान ले लो,
जो करो वास्तविक करो,
तुरंत करो, दर्शक वही चाहते हैं ।
अभी अतिनाटकीयता ना मंच पर अच्छी लगती है
और ना ही असल ज़िन्दगी में ।

ये भी ज़रूरी नहीं की कुछ करो ही,
घर बैठ कर समीक्षक बनने में भी बुराई नहीं,
अच्छे बुरे को अपने मापदंड से
आंकना भी ग़लत नहीं,
जो करो आँखों में आँखे डालकर,
सीना ठोक कर करो।
अभी अतिनाटकीयता ना मंच पर अच्छी लगती है
और ना ही असल ज़िन्दगी में ।


यह रचना  संदीप श्याम शर्मा जी द्वारा लिखी गयी है . आप जयपुर से मैनेजमेंट में स्नातक पूर्ण कर मैनेजमेंट में स्नातकोत्तर करने को दिल्ली आये , फाइनेंस और मार्केटिंग में एम. बी. ए. करने के पश्चात् मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने लगे , लेकिन रंगमंच और साहित्य के प्रति अपनी रूचि को ज़्यादा समय तक छिपाकर नहीं रख सके  । रंगकर्म शुरू कर दिया, लगातार कर रहे है . साहित्य की विविध विधाओं में लेखन कार्य में संलग्न हैं .
संपर्क सूत्र -
संदीपश्यामशर्मा जयपुर, राजस्थान संपर्क: 9602424788, मेल: sandeepshyam.sharma@gmail.com

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