0
Advertisement

कुछ गुनगुना दिया कर

पट खोल 
चाँद 
कभी आ जाया कर 
आँगन में 
यहीं पर सँवर लिया कर,
गमले में
चित्र साभार - dollsofindia.com
बैठे फूलों से 
खड़े पौधों से 
पंखुड़ियों से 
बातें कर 
मधु रस घोल 
अतीत भुला 
प्रभात पुंज जुगुनू की तरह 
संघर्ष 
अटल विश्वास 
सामने रख 
हमें सुशोभित कर दिया कर I 
निहारे,करते प्रतीक्षा 
रोज 
हर दिन 
संध्या के प्रबल रंग 
प्रसन्न पेड़ पीपल के 
हरित घास 
मस्तमौला सी 
और उन्हीं घासों पर 
रंग पड़े अजीब से 
अथक खड़े 
वीर से 
कुछ गुनगुना दिया कर I 

यह रचना अशोक बाबू माहौर जी द्वारा लिखी गयी है . आपकी विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी है . आप लेखन की विभिन्न विधाओं में संलग्न हैं . संपर्क सूत्र -ग्राम - कदमन का पुरा, तहसील-अम्बाह ,जिला-मुरैना (म.प्र.)476111 ,  ईमेल-ashokbabu.mahour@gmail.com

एक टिप्पणी भेजें

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top