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गंगा नदी

गंगा नदी अथवा पवित्र नदी , जैसा कि नाम से ही प्रकट होता है , हमारे भीतर श्रध्दायुक्त विस्मय और आध्यात्मिकता की भावना का संचार करती है . इसका कारण शायद यह है कि हमारी सभ्यता और संस्कृति के इतिहास में गंगा नदी सबसे महत्वपूर्ण नदी रही है . हालांकि भारत में अनेकों नदियाँ हैं किन्तु गंगा नदी भारत के इतिहास ,संस्कृति ,धर्म और प्रगति की प्रतिक है .

उद्गम

गंगा नदी का उद्गम  बर्फ से आच्छादित विशालकाय हिमालय के गंगोत्री नामक स्थान पर है ,जिसे अत्यंत
गंगा नदी
गंगा नदी
पवित्र स्थान माना जाता है . गंगा नदी के बारे में पुराणों में अनेक किंवदंतियाँ है जो इसे पारलौकिक स्वरुप देती हैं और इस नदी को देवी के रूप में महिमामंडित करती हैं . लोग गंगा नदी की पूजा करते हैं और इसके जल को पवित्र और शुद्ध मानते हैं .

गंगा का सौन्दर्य

भौगोलिक रूप से गंगा का सौन्दर्य अतुलनीय है क्योंकि यह पहाड़ों से होकर बहती है , विदारिकाओं और दर्रों में तीव्र धारा का रूप लेती है और अनेक जलप्रपातों - झरनों आदि को जन्म देती है . यह नदी पहाड़ों से जिन - जिन स्थानों से होकर गुजरती है , वहां मंदिर बने हुए हैं . हरिद्वार ,जहाँ आकार यह मैदानी क्षेत्र में पहुँच जाती है ,भारत का अत्यंत पवित्र स्थान माना जाता है . आस - पास से ही नहीं ,बल्कि दूर - दूर से लोग वहां पवित्र स्नान करने आते हैं . यह नदी अपने आप में सौदर्य का प्रतिमान है . जब यह मैदानी क्षेत्रों से टेढ़े - मेढ़े आकार में बहते हुए आगे जाती है तो दृश्य देखने लायक होता है . 

धार्मिक महत्त्व व आर्थिक महत्त्व

इस नदी का इतिहास अत्यंत मोहक है . सबसे पहले लोग इसी नदी के किनारे बसे और घाटी समृद्ध सभ्यता के रूप में परिवर्तित हो गयी . इन्ही मैदानों पर इतिहास के अनेकों युद्ध लड़ें गए .कई साम्राज्य स्थापित हुए तो कई ध्वस्त हो गए . गंगा नदी इनकी फसलों के पानी का स्रोत और उनकी नौकाओं के लिए परिवहन का माध्यम बनी रही . 

प्रदूषण एवं पर्यावरण

आज भी गंगा नदी लाखों भारतीयों लोगों के लिए जीवनदायनी है .हमारी कृषि का एक बड़ा भाग इसके बारहमासी जल स्रोत पर निर्भर है . प्राचीन भारत बड़े शहरों और नगरों में परिवर्तित हो गए हैं . हमें गंगा नदी को प्रदूषण और औद्योगिककरण से बचाना चाहिए . इसके पानी को नगरों के अपशिष्ट से अवश्य मुक्त रखा जाना चाहिए . इस महाकाय नदी का जल हमेशा ही शुद्ध और पवित्र रखा जाना चाहिए . क्योंकि यह मात्र एक नदी ही नहीं है ,यह हमारे लिए पूजनीय भी है . 

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  1. आपकी ब्लॉग पोस्ट को आज की ब्लॉग बुलेटिन प्रस्तुति रानी दुर्गावती और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। सादर ... अभिनन्दन।।

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