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चॉंद-तारों को हंसीं शोख़ अदाएं दीं हैं /सुबोध श्रीवास्तव की ग़ज़लें
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(एक)

चॉंद-तारों को हंसीं शोख़ अदाएं दीं हैं,
जैसे बच्चों को किसी माँ ने दुआएं दीं हैं।

मुझे यकीं है कि दुनिया को फतह कर लूंगा,
मेरी माँ ने मुझे जीभर के दुआएं दीं हैं।
सुबोध श्रीवास्तव

हां,  बेटियों से मेरे घर में बहारें आईं,
मेरे मालिक ने ये शीतल सी हवाएं दीं हैं।

मैं सोचता था कि मुझको वो हौंसला देगा,
न जाने क्यों मुझे उसने ये सज़ाएं दीं हैं।

आसमानों से उतर आये हैं मेरे अशआर,
'सुबोध' ने जो ग़ज़ल कहकर सदाएं दीं हैं।
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(दो)

न फूलों की बातें, न पत्थर की बातें,
ये बातें हैं तेरे, मेरे घर की बातें।

न पनघट की बातें, न गागर की बातें,
नदी कर रही है समंदर की बातें।

हों मोबाइलों से, या ईमेल से हों,
कहां रह गयी हैं कबूतर की बातें।

कभी मंदिरों में, कभी मस्जिदों में,
अजी हो रही हैं बवंडर की बातें।

नहीं करता कोई भी मंज़िल पे आकर,
न रहज़न की बातें, न रहबर की बातें।
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यह रचना सुबोध श्रीवास्तव जी द्वारा लिखी गयी है।  आप पत्रकारिता (वर्ष 1986 से)। 'दैनिक भास्कर', 'स्वतंत्र भारत' (कानपुर/लखनऊ) आदि में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं।  आपकी नई कविता, गीत, गजल, दोहे, मुक्तक, कहानी, व्यंग्य, निबंध, रिपोर्ताज और बाल साहित्य। रचनाएं देश-विदेश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं,प्रमुख अंतरजाल पत्रिकाओं में प्रकाशित। दूरदर्शन/आकाशवाणी से प्रसारण भी चुका है।  आपकी प्रकाशित कृतियां: -'सरहदें' (काव्य संग्रह) -'पीढ़ी का दर्द' (काव्य संग्रह) -'ईष्र्या' (लघुकथा संग्रह) -'शेरनी मां' (बाल कथा संग्रह) -‘कविता अनवरत-2’, ‘कानपुर के समकालीन कवि’ सहित कई काव्य संकलनों में रचनाएँ संकलित। -विशेष: काव्यकृति 'पीढ़ी का दर्द' के लिए उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा पुरस्कृत। -साहित्य/पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा 'गणेश शंकर विद्यार्थी अतिविशिष्ट सम्मान'। -कई अन्य संस्थाओं से भी सम्मानित।
संपर्क सूत्र - 'माडर्न विला',10/518, खलासी लाइन्स, कानपुर (उ.प्र.)-208001, उत्तर प्रदेश (भारत)। मोबाइल: 09305540745/9839364419

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