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जाना कहा है आज

निकलता हूँ घर से रोज
दिल में ख्याल आता है
जाना कहा है आज
घर की देहलीज छोड़कर
मन ही मन हारकर
दिल में ख्याल आता है
रवि सुनानिया
जाना कहा है आज
उम्मीदों की पतंग उड़ाकर
माँ बाप के साथ थोडा खिलखिलाकर
दिल में ख्याल आता है
जाना कहा है आज
पक्षीयो की कलरव ध्वनि सुनकर
हाथो में रोटी का डब्बा लेकर
दिल में ख्याल आता है
जाना कहा है आज
करता कोशिश कुछ वक़्त जीने की
जिंदगी से दो पल खुशिया लेने की
दिल में ख्याल आता है
जाना कहा है आज
खाली डब्बा लिए निकलता हूँ वापस
साँझ ढले जैसे सब पंझी
जाते अपने घर की और
और फिर दिल में ख्याल आता है
जाना कहा है आज
जाना कहा है आज ।।

यह रचना रवि सुनानिया जी द्वारा लिखी है . आप मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के ग्राम कनासिया से हैं तथा साहित्य रचना में गहरी रूचि रखते हैं . 

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