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लोकोक्ति / Hindi Proverbs 

लोकोक्ति का अर्थ होता है - लोक में प्रचलित उक्ति अथवा कथन . लोकोक्तियाँ जनसाधारण के अनुभवों ,किसी घटना ,कहानी अथवा तथ्य पर आधारित होती है . इनका प्रयोग किसी विचार के समर्थन में किया जाता है ,जिससे कथन प्रभावशाली हो जाता है . ये प्रायः स्वतंत्र वाक्यों की भाँती प्रयोग की जाती है . यहाँ पर कुछ लोकोक्तियाँ ,उनके अर्थ व प्रयोग दिए जा रहे हैं -

१. अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत ( अवसर निकल जाने पर पछताना बेकार है ) - परीक्षा में फेल हो जाने पर मुकेश बहुत पछताने लगा ,तब उसकी माताजी ने कहा - बेटा अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत .

२. आँख के अंधे नाम नैनसुख (गुण के विपरीत नाम होना ) - उसके पास तो फूटी कौड़ी भी नहीं और नाम अमीर अली यह तो वही बात हुई कि आँख के अंधे नाम नैनसुख .

३. एक और एक ग्यारह होते हैं (एकता में बल होता है ) - सभी नवयुवक व युवतियां मिलकर ही समाज से दहेज़ जैसी कुप्रथा को मिटा सकते हैं ,क्योंकि एक और एक ग्यारह होते हैं .

४. अंधों में काना राजा ( मूर्खों में कम बुद्धि वाला ही समझदार माना जाता है ) - मोहन ही अपने गाँव में एक मात्र ऐसा व्यक्ति है जो अंग्रेजी जानता है .वह तो अंधों में काना राजा बना फिरता है .

५. अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता (अकेला व्यक्ति कोई बड़ा काम नहीं कर सकता ) सभी व्यक्ति मिलकर प्रयास करें तो कार्य आसानी से हो जाता है . एक अकेला व्यक्ति क्या  कर सकता है ? क्योंकि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता है .

6. आम के आम गुठलियों के दाम (दोहरा लाभ ) - वह मुकदमें में भी जीत गया और उसके बेटे को नौकरी भी मिल गयी . इसी को कहते हैं - आम के आम गुठलियों के दाम .

७ . एक अनार सौ बीमार ( एक बस्तु के अनेक माँगने वाले ) कंपनी में मैनेजर का एक पद रिक्त था .जिसके लिए सौ लोगों ने निवेदन किया . इसे कहते हैं - एक अनार सौ बीमार .

८ . उल्टा चोर कोतवाल को डांटे (अपराधी निरपराध पर दोष लगाए) - एक तो आपने मेरी किताब फाड़ दी और अब मुझे ही गालियाँ दे रहे हो . इसे कहते है - उल्टा चोर कोतवाल को डांटे .

९. ऊँट के मुँह में जीरा ( खाने की बस्तु का आवश्यकता से कम होना ) राजू आठ रोटियाँ खाता है और तुम उसे मात्र दो ही रोटियाँ दे रहे हो . यह तो ऊँट के मुँह में जीरा वाली बात हो गयी .

१० . ऊँची दूकान फ़ीका पकवान (दिखावा अधिक ,काम कम ) इस विद्यालय का नाम तो बहुत सुना था और इसकी इमारत भी अच्छी है , परन्तु यहाँ तो अध्यापक भी पूरे नहीं और जो है भी वे कम पढ़े लिखे तथा अनुभवहीन हैं . इसे ही कहते हैं - ऊँची दूकान फ़ीका पकवान .


११. एक पंथ दो काज ( एक साथ दो लाभ प्राप्त करना ) - मैं हरिद्वार गंगा -स्नान भी करूँगा और अपने चचेरे भाई से मिल आऊंगा .इसे कहते हैं - एक पंथ दो काज .

१२. काला अक्षर भैंस बराबर (अनपढ़ होना ) - जब राकेश से बैंक मैनेजर ने हस्ताक्षर करने के लिए कहा तो वह सकुचाते हुए कहने लगा - "साहब ,मेरे लिए काला अक्षर भैंस बराबर है ,मैं तो अंगूठा लगाना जानता हूँ . "

१३. खोदा पहाड़ निकली चुहिया (परिश्रम अधिक ,लाभ बहुत कम ) - पुरानी हवेली के तोड़ने में लागत करोड़ों में आ गयी पर मिले लाखों भी नहीं , ये तो वही बात हुई कि खोदा पहाड़ निकली चुहिया .

१४. घर का भेदी लंका ढाए ( आपसी फूट का परिणाम भयानक होता है ) - कुछ देशद्रोही भारतीय ,पाकिस्तानी लोगों से मिलकर देश को तोड़ने का काम कर रहे हैं .इसे ही कहते हैं - घर का भेदी लंका ढाए.

१५ . चोर ही दाढ़ी में तिनका (अपराधी स्वयं शंकित रहता है ) मैंने आप पर तो किताब फाड़ने का इल्जाम लगाया नहीं . आप सफाई क्यों पेश कर रहे हैं . लगता है आपने ही मेरी किताब फाड़ी है .क्योंकि चोर ही दाढ़ी में तिनका होता है .

16. छोटे मुँह बड़ी बात (बढ़ चढ़कर बाते करना ) - चाचा जी ने अपने पोते से कहा ,इतनी बड़ी - बड़ी बातें बनाना ठीक नहीं होता है . तुम्हारे जैसे बच्चे के मुँह से छोटे मुँह बड़ी बात शोभा नहीं देती हैं .

१७ . जिसकी लाठी उसकी भैंस (जो शक्तिशाली है ,उसी का अधिकार माना जाता है ) - आजकल भलाई -बुराई ,न्याय -अन्याय कौन देखता है ? अब तो जिसकी लाठी उसी की भैंस का जमाना है .

१८ . आग लगे खोदे कुआँ ,कैसे आग बुझाये (पहले से काम की व्यवस्था न करना ) शाम को बारात आ रही है और तुम अब सामान खरीदने जा रहे हो . इसी को कहते हैं - आग लगे खोदे कुआँ ,कैसे आग बुझाये.

१९ . अंधे के हाथ बटेर लगना (अचानक मनचाही वस्तु मिल जाना ) - वह तो बिना परिश्रम किये ही उत्तीर्ण हो गया . इसे कहते हैं कि अंधे के हाथ बटेर लगना .

२० . दूध का दूध ,पानी का पानी (उचित न्याय करना ) - न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की बात सुनी और दूध का दूध ,पानी का पानी कर दिया .

२१. चिराग तले अँधेरा (अपनी बुराई न दिखना ) - लालाजी दूसरों के बच्चों में तो दोष निकालते हैं ,परन्तु उन्हें अपने पुत्र में कोई दोष नज़र नहीं आता . इसे कहते हैं - चिराग तले अँधेरा .

२२. थोथा चना बाजे घना ( अयोग्य व्यक्ति व्यर्थ ही अपनी तारीफ़ करना है ) उसे ठीक से तो अंग्रेजी आती नहीं और बात - बात पर अंग्रेजी बोलता है . इसे कहते हैं कि थोथा चना बाजे घना .

२३. नाच न जाने आँगन टेढ़ा (स्वयं काम न आने पर दूसरों को दोष देना ) रमेश से तबला तो ठीक से बजाया नहीं जाता और दोष देने लगता है गायक को . इसे ही कहते हैं - नाच न जाने आँगन टेढ़ा .

२४. मान न मान मैं तेरा मेहमान ( जबरदस्ती गले पड़ना ) मैं तो आपको जानता भी नहीं और आप कह रहे हैं कि आपका मित्र हूँ . यह तो वही बात हुई न - मान न मैं तेरा मेहमान .

२५. जाको राखे साइयाँ मार सके न कोय ( जिसकी ईश्वर रक्षा करता है , उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है ) - अंकित छत से नीचे गिर गया पर कमाल तो देखिये कि उसे एक खरोंच तक नहीं आई . सत्य ही कहा है - जाको राखे साइयाँ मार सके न कोय .

२६. जितने मुँह उतनी बातें ( प्रत्येक की अलग - अलग राय ) - अभी तक सड़क दुर्घटना का पता नहीं चला . अभी तक जितने मुँह उतनी बातें हो रही हैं .

२७. ईश्वर की माया ,कहीं धूप कहीं छाया ( संसार की गति विचित्र है ) - इस संसार में धनी - गरीब ,सुखी - दुखी ,कमज़ोर - बलवान सभी प्राणी पाए जाते हैं . सत्य है - ईश्वर की माया ,कहीं धूप कहीं छाया .

२८ . आँख का अँधा नाम नयनसुख ( नाम के प्रतिकूल कार्य करना ) - उसका नाम राजा है ,किन्तु वह नौकर का काम करता है .ठीक की कहा है - आँख का अँधा नाम नयनसुख

२९. जो गरजते हैं वो बरसते नहीं ( जो डींग मारते हैं ,वे प्राय : काम नहीं करते हैं ) - रानी  ने कहा है कि वह दौड़ में प्रथम आएगी ,परन्तु वह हार गयी . सच ही कहा है कि जो गरजते हैं वो बरसते नहीं .

३० . छोटा मुँह बड़ी बात ( योग्यता से बढ़कर बात करना ) - बुढ़ापे में बेटा बाप को समझाने लगता है . यह तो छोटा मुँह बड़ी बात हुई .

३१ . डूबते को तिनके का सहारा ( विपत्ति में सहायता ) - नौकरी छिन जाने पर अतुल  को पंकज ने मदद की . इस तरह डूबते को तिनके का सहारा मिला .

३२. न रहेगा बाँस , न बजेगी बाँसुरी ( समस्या की जड़ को समाप्त कर देना )- रजनीश  सारा दिन कमरे में बैठा टीबी देखता रहता था . पिता जी ने गुस्से में टीबी तोड़कर फेंक दि . यह तो वही बात हुई - न रहेगा बाँस , न बजेगी बाँसुरी

३३. रस्सी जल गयी पर बल नहीं गया ( हानि होने पर भी अहंकार न गया ) - सारा धन गँवा कर भी उसकी अकड़ नहीं गयी . सच ही कहा गया कि रस्सी जल गयी पर बल नहीं गया .

३४ . भानुमती का पिटारा ( थोड़े में बहुत ) - हमारे रक्त की एक बूँद भानुमती के पिटारे जैसी ही है , इसमें हजारों रक्त कण है .

३५ . मुँह में राम बगल में छुरी ( सामने शुभचिंतक बनना पर पीठ - पीछे अहित करना ) - राज  मेरा दोस्त बनता है ,पर दूसरों में शिकायत करता रहता हैं . यह तो वही बात हुई कि मुँह में राम बगल में छुरी . 

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