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भ्रष्टाचार

वर्तमान युग में जीवन इतना सरल ,सहज नहीं है जितना कि माना जाता है . हमें पग - पग पर ऐसे सोचनीय व्यवहारों का सामना करना पड़ता है ,जिन्हें देख कर व सुनकर विस्मय और दुःख की अनुभूति होती है . आज समाज में अनैतिकता ,अराजकता ,स्वार्थपरता चरों तरफ फैली हुई . कर्तव्य परायणता ,सत्यप्रियता ,निस्वार्थता तथा परोपकार की भावनाएँ जो कभी मानवता के प्रतीक चिन्ह के रूप में थी ,कहीं किसी कोने में दबकर रह गयी हैं . 

भ्रष्टाचार के कारण 

भ्रष्टाचार के मुख्य कारणों में असंतोष पहला कारण है .जब एक व्यक्ति के मन में दूसरे व्यक्ति के प्रति हीनता ,ईर्ष्या की भावना उत्पन्न होती है तो वह इन भावनाओं के कारण भष्टाचार का शिकार हो जाता है . अन्याय और निष्पक्षता के अभाव में भ्रष्टाचार का जन्म होता है . जब प्रशासन या समाज किसी व्यक्ति या वर्ग के प्रति
अन्याय करता है या उसका शोषण करता है ,तो ऐसे में व्यक्ति या वर्ग उसके प्रति निष्पक्ष नहीं रह जाता और अपनी दुर्भावना भ्रष्टाचार को उत्पन्न करने में लगा देता है तब इसी के फलस्वरूप चोरी ,रिश्वतखोरी और छलकपट का जन्म होता है . 

भ्रष्टाचार के प्रकार 

भ्रष्टाचार एक ऐसी दलदल है . जिसमे एक बार फँसा व्यक्ति कभी बाहर नहीं निकल पाता . आज समाज के चारों तरफ भ्रष्टाचार की जड़ें गहराई तक फैली हुई हैं . मिलावट ,भाई-भतीजावाद ,अनुचित मुनाफाखोरी ,कर्तव्य पालन में कोताही ,सरकारी साधनों का गलत इस्तेमाल आदि भष्टाचार के रूप हैं . 

भ्रष्टाचार उन्मूलन के उपाय 

यद्यपि भ्रष्टाचार उन्मूलन एक बहुत बड़ा कार्य है ,तथापि इस दिशा में प्रयास की अत्यंत आवश्यकता है . हमारी शिक्षा प्रणाली में नैतिक शिक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए . प्रत्येक विभाग में चारित्रिक गुणवत्ता बनाये रखने के लिए मानदंड निर्धारित होने चाहिए .जिसमे प्रशासन को नेताओं के दबाव से मुक्त करना चाहिए .नागरिकों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों का ज्ञान होना चाहिए .मतदान के समय लालच या बह्कावें में न आकर उचित व्यक्ति का ही चयन किया जाना चाहिए . 

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