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धूप में सेक लिए
धूप में सेक लिए

धूप में सेक लिए धूप में सेक लिए पर अपने, गौरैया नाहकर आई कहाँ से ? नदी तालाब से भींगी  है अभी भी रुआं अनेकों I हवा मस्तानी क...

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नशा -विनाश की ओर बढ़ते कदम
नशा -विनाश की ओर बढ़ते कदम

नशा -विनाश की ओर बढ़ते कदम                  (31 मई विश्व तम्बाखू निर्मूलन दिवस पर) अनुभूतियों और संवेदनाओं  का केन्द्र मनुष्य ...

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क्या मै लिख सकूँगा
क्या मै लिख सकूँगा

अनुत्तरित प्रश्न  एक जंगल था , बहुत प्यारा था सभी की आँख का तारा था। वक्त की आंधी आई, सभ्यता चमचमाती आई। इस सभ्यता के हाथ में आरी थी...

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जाना कहा है आज
जाना कहा है आज

जाना कहा है आज निकलता हूँ घर से रोज दिल में ख्याल आता है जाना कहा है आज घर की देहलीज छोड़कर मन ही मन हारकर दिल में ख्याल आता है रव...

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मुखाग्नि
मुखाग्नि

                मुखाग्नि हमारे संभाग में अरुण कुमार नये कमिश्नर बन कर आये थे। मैं उनसे मिलने उनके बंगले पर गया। बड़ा सरकारी बंगला था जि...

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भ्रष्टाचार
भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार वर्तमान युग में जीवन इतना सरल ,सहज नहीं है जितना कि माना जाता है . हमें पग - पग पर ऐसे सोचनीय व्यवहारों का सामना करना पड़ता है...

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