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मिडिया की छवि

देश में,राज्य में,हमारे आस-पास,विदेशो में, और देश के कर्णधार नेताओं की छवि की जानकारी | ये सारी बातें आम आदमी जानता है मिडिया के माध्यम से | और मिडिया आम आदमी के सम्मुख कैसी ख़बरें देता है - जो झूठ से सरोबार हो | देश के हित में काम करने वाले का बंटाधार कर जिसने देश का सफाया करने में कोई कसर नहीं छोड़ी उसकी तारीफों के पुल बाँधता है और दूसरों की धज्जियाँ उड़ाता है |

           पानी की परेशानी इन दिनों आम बात है | मैंने समाचार में देखा कि किस प्रकार मिडिया में सरकार को कोसते हुए जिक्र किया जा रहा था,जैसे 'अमुक इलाके में पानी की कमी सरकार ने जानबुझकर करवाई है |' लेकिन सरकार को जब जनता की परेशानी पता चली तुरंत सरकार ने  रेलों द्वारा पानी पहुँचाया | लेकिन हमारी मिडिया ने सरकार की अच्छाई को उजागर करना मुनासिब नहीं समझा |
             ये मिडिया देशद्रोहियों का ग्राफ़ ऊँचा कराती है और जो देशहित के लिए काम करें उन्हें नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ती | बार - बार चिल्लाकर कहती है कि "सरकार को दो साल हो गए, क्या किया ?" भाई जिस सरकार के हाथ में 65 सालों तक बागडोर थी उसने क्या किया ? उनसे सवाल पूछने की हिम्मत शायद मिडिया में नहीं है | बोलने की स्वतंत्रता है,भले ही देश के खिलाफ नारेबाजी करें,किंतु वे सहीं है --मिडिया की नजर में | मिडिया उन्हें नौजवानों का नायक बनाकर पेश करती है |
        आरक्षण,असहिष्णुता  इस शब्द ने देश की कमर तोड़ दी लेकिन मिडिया इस तरह की खबरों में मसाला भर कर लोगों के बीच परोसती है | यहाँ पर भी सरकार को दोष दिया जा रहा है कि सरकार की वजह से असहिष्णुता फ़ैल रही है |
       समझ नहीं आता कि मिडिया जनता तक क्या पहुँचाना चाहती है | देश को खोखला करना चाहती है,या देश की नींव मजबूत करना चाहती है | यदि मिडिया जनता को  सच्चाई से अवगत करवाए तो देश की जनता भी अपना निर्णय सही ले पाएगी और वह देश की बागडोर सही हाथों में सौंप पाएगी  |
       अभी चुनाव का मौसम चल रहा है | जहाँ-जहाँ चुनाव हो रहा है मिडिया सरकार के खिलाफ चुनाव प्रचार करवाने वालों की ख़बरें दिखाकर जनता में आक्रोश भरा रही हैं |  मिडिया  आज तक सरकार द्वारा किए प्रशंसनीय कार्यों को बताना या जनता के सम्मुख लाना आवश्यक नहीं समझती है | आज हमारे देश की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है | भ्रष्टाचार भी कम हुआ है | ऐसे मामलों को मिडिया बताना आवश्यक नहीं समझती | बस हमेशा अपने चैनलों पर बेबुनियाद बातों को लेकर दिनभर कानफोडू आवाज में बक-बक मैं बक बक इसी शब्द का प्रयोग करुँगी | क्योंकि उनका  बोलने का तरीका 'देखिए इस शक्स को, देखिए गौर से ' इस तरह के वाक्य बार -बार दिखाकर जनता को पूरी तरह से हताश करते है |
          हद तो तब हो जाती है जब हम सोचते है चलों ठीक है आजकल खबरी चैनल खबरें कम मसाला  ज्यादा दिखाते है इसी में कभी उनके दिमाग में आता है कि जनता को कुछ जगहों या और किसी तरह की जानकारी से रूबरू करवा दें ,और वह उस जानकारी को बड़े ही रोचक अंदाज में प्रस्तुत करती है | हम जैसी जनता बैठ भी जाती है और पूरा कार्यक्रम देख लेती है | कार्यक्रम होने  के पश्चात समझ में आता है कि बिना वजह रात की नींद ख़राब की |
        एक समय था जब हम सारे परिवार वाले इकट्ठे हो 20 मिनट का समाचार देखते थे और मुझे याद आता है सामाजिक अध्ययन में सियासत से जुड़े प्रश्नों के उत्तर मैं समाचार देखने की आदत की वजह से दे पाती थी | और आज हालत देखकर रोना आता है | आजकल मिडिया को राजनैतिक ख़बरों की  जो आवश्यक जानकारी जनता ,विद्यार्थियों तक सही सलामत पहुँचनी चाहिए उसे तोड़-मरोड़कर जनता के सम्मुख परोसता है | सिने तारक-तारिकाओं की जीवन शैली बताना और वह भी दिनभर उसी एक खबर को प्रत्येक चैनल पर सुर्ख़ियों में दिखाना --आखिरकार ये खबरी चैनल अपनी कौनसी बिसात रखना चाहते है ? यह प्रश्न मेरा ही नहीं उस हर आम आदमी का है जो अपने कीमती समय में से कुछ समय वह दूरदर्शन के सामने यह सोचकर बैठता है कि देश- विदेश में क्या हो रहा है जानले | लेकिन उसे सिवाय तकलीफ़ के और कुछ नहीं मिलता | उस वक्त उसकी हालत बस यही होती है "तेरे कुचे से निकले बेआबरू होकर" | 

यह रचना जयश्री जाजू जी द्वारा लिखी गयी है . आप अध्यापिका के रूप में कार्यरत हैं . आप कहानियाँ व कविताएँ आदि लिखती हैं . 

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  1. सरकार की अपना सूचना प्रणाली है. वह अखबारों पर निर्भर नहीं करती. बल्कि अखबार उन पर निर्भर होते हैं.आप कब तक कसांग्रेस का रोना रोती रहेंगी. ्पनी करनी की बात करो दूसरों की रोते क्यों रहते हो. सीखो ईश्वरचंद्र जी की बातों से किसी लकीर को छोटा करने के लिए उसे मिटाएं नहीं , दूसरी बड़ी लकीर खींचें. अब तो अखबर भी मोदी राग ही अलवापते रहैं फिर भी आपको शिकायत है.लोग तो कह रहे हैं- कि राम और अशोक के बाद मोदी का ही नंबर है...
    अयंगर.

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  2. सही कहा आपने मिडिया हमें पूरी दुनिया की खबरें एक जगह पर ही बैठे मिल जाती हैं.

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  3. मैं किसी पार्टी के लिए फिक्रमंद नहीं हूँ चाहे कोइ भी हो मैं बस अपने देश को आगे बढ़ते हुए देखना चाहती हूँ

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