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भुल्लकड़ बेटा

अश्विन गुप्ता
वृद्धाश्रम में टेबल पर बैठ वो माँ चुपचाप खाना खाये जा रही थी । एक निवाला अपने गले से नीचे उतारती और पानी का एक घूंट पी लेती, फिर ऊपर देखती और कुछ सोचने लगती ।
 दूर बैठी एक दूसरी माँ से रहा नहीं गया और वो उस माँ से पूछने आ बैठी : क्या हुआ बहन ? तुम बहुत दुखी लग रही हो ? कुछ बात हो तो बताओ ।
तो वो माँ बोली : कुछ नहीं बहन, मैं अपने भुल्लकड़ बेटे के लिए भगवान से क्षमा मांग रही हुँ ।
दूसरी माँ बोली : क्यों ? क्या भूल गया आपका बेटा ?
तो रोते हुए माँ बोली : मेरा बेटा इतना भुल्लकड़ है कि अपने नए बंगले में मेरे लिए कमरा बनाना ही भूल गया । भगवान उसे क्षमा करें ।


यह रचना अश्विन गुप्ता जी द्वारा लिखी गयी है . आप  सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं . आप  कवितायेँ, कहानियाँ और लेख आदि विधाओं पर अपनी लेखनी चलाते हैं .

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